Sun, 20 Sep 2026
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नरवाई को जलाना पूर्णत प्रतिबंधित किया नरवाई प्रबंधन, उन्नत यंत्रों का उपयोग एवं धरती माता को सुरक्षित रखें

*धार 27 मार्च 2026।* रबी सीजन में नरवाई जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री प्रियंक मिश्रा द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत जिले की राजस्व सीमा क्षेत्र हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश अनुसार जिला अंतर्गत फसल कटाई के पश्चात बचाने वाले अवशेष कुंट एवं डंठल (नरवाई) को जलाना पूर्णत प्रतिबंधित किया गया है। जिले मे इस सीजन मे अभी तक सेटेलाईट के माध्यम से जिन क्षेत्रो मे नरवाई जलाने की घटनाएं दर्ज की गई उन क्षेत्रो मे पंचनामा तैयार किया जाकर नोटिस जारी करने एवं अर्थदण्ड की कार्यवाही की जावेगी।

 

        नरवाई में आग लगाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखने के लिये नरवाई प्रबंधन के यंत्रों जैसे एक्स्ट्रा रीपर, रीपर, रीपर कंबाइंडर, एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, सुपर सीडर, मल्चर, बेलर इत्यादि का उपयोग किया जाना चाहिए। रीपर (ट्रैक्टर चालित/स्वचालित) खड़ी फसल को जड़ के पास से काटकर कतारों में व्यवस्थित रखता है। स्ट्रा रीपर यह यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर के बाद खेत में बची नरवाई को काटकर भूसा तैयार करता है। इसके अतिरिक्त कृषक बन्धु फसल अवशेष को तेज धूप के बाद रोटावेटर का उपयोग करके अथवा देशी पाटा चलाकर गेहूं के बचे हुए स्ट्रा को जमीन में मिला सकते हैं। स्ट्रा को जमीन में मिलाने से जमीन की भौतिक दशा एवं कंपोस्टिंग खाद मिलने से जमीन की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है। इसी कडी मे जिले के ग्राम तिसगांव, बडौदा, चालनी, सलकनपुर, चन्दवाडा इत्यादि गाव के कृषक श्री राहुल राठौर, घनश्याम पिता भेरूलाल, राजू पिता हीरालाल, कृष्णा पटेल इत्यादि कृषको द्वारा धरती मां को जलने से बचाने की दिशा में नरवाई प्रबंधन के यंत्रो का उचित उपयोग किया जा रहा है। इसलिए नरवाई नहीं जलाने हेतु कृषक बंधुओ से अपील की जाती है कि वर्तमान में हम धरती मां को सुरक्षित रखने से, मिटटी मे कार्बनिक तत्व की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से तथा जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान बचाने के उद्देश्य से मिट्टी स्वस्थ बनाए रखने हेतु नरवाई नहीं जलाएं उपरोक्त उचित प्रबंधन में यंत्रों का उपयोग करते हुए धरती मां को सुरक्षित रखें। जिले के कृषको द्वारा गेहूं की कटाई का कार्य अंतिम स्थिति है। अनेक कृषक फसल कटाई कार्य कंबाइन हार्वेस्टर से कर रहे हैं जिससे कटाई उपरांत खेतों में फसल अवशेष रह जाते हैं। विगत वर्षों में फसल शेष अवशेष को जलाने की घटनाएं परिलक्षित हुई है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव एवं केंचुए मर जाते हैं और भूमि कठोर हो जाती है जिससे आगामी सीजन की बोवाई हेतु खेत की तैयारी करने में में अधिक ऊर्जा एवं समय लगता है। साथ ही मृदा के महत्वपूर्ण तत्व (कार्बनिक पदार्थ) भी नष्ट हो जाते है जिससे फसलो की उत्पादकता भी प्रभावीत होती है।

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