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गाजियाबाद में पाकिस्तानी जासूसी रैकेट के सनसनीखेज खुलासे ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि संवेदनशील इलाकों में लगे कैमरों का लाइव फुटेज सीधे सीमा पार पाकिस्तान भेजा जा रहा था। इस खुलासे के बाद केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर है और देश के डिजिटल सुरक्षा ढांचे को अभेद्य बनाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
सीसीटीवी नेटवर्क का होगा ऑडिट
जासूसी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद गृह मंत्रालय ने देशव्यापी सुरक्षा जांच का फैसला लिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर देशभर के मौजूदा सीसीटीवी नेटवर्क का ऑडिट करेंगी। इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य उन सभी सुरागों और तकनीकी खामियों को जड़ से खत्म करना है, जिनका फायदा उठाकर दुश्मन देश भारत की गोपनीय जानकारी चुरा रहे हैं। विशेषकर सरकारी संस्थानों और भीड़भाड़ वाले संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी प्रणाली को अब नए प्रोटोकॉल के तहत जांचा जाएगा।
1 अप्रैल से लागू होंगे सख्त नियम
सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए सरकार ने 1 अप्रैल से बाजार में सीसीटीवी की बिक्री को लेकर कड़े नियम लागू करने का निर्णय लिया है। अब भारत में केवल वही कैमरे बेचे जा सकेंगे जिन्हें सरकारी सुरक्षा जांच यानी STQC सर्टिफिकेशन प्राप्त होगा। वर्तमान में भारत के सीसीटीवी बाजार पर लगभग 80 प्रतिशत कब्जा चीनी कंपनियों का है, जिनसे डेटा चोरी का जोखिम हमेशा बना रहता है। नई व्यवस्था के तहत फिलहाल केवल 7 कंपनियों के 53 मॉडल्स को ही पूरी तरह सुरक्षित और 'हैकिंग प्रूफ' माना गया है, जो इस सर्टिफिकेशन की कसौटी पर खरे उतरे हैं।
डेटा लीक और साइबर वारफेयर का खतरा
सीसीटीवी सिस्टम के जरिए निजी और रणनीतिक डेटा लीक होना वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर वहां के वीआईपी मूवमेंट को ट्रैक करने का उदाहरण सबके सामने है। इसी तरह की हैकिंग के खतरे को देखते हुए भारत सरकार अब रीयल-टाइम डेटा सुरक्षा पर जोर दे रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि समय रहते निगरानी प्रणालियों को स्वदेशी या प्रमाणित तकनीक से रिप्लेस नहीं किया गया, तो देश की सुरक्षा में बड़ी सेंध लग सकती है।


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