दूसरों की सेवा और परोपकार का दूसरा नाम है “पूजा”
सब कुछ भगवान है ,ऐसा स्वीकार कर लेना सर्वश्रेष्ठ साधन है ।
संसार में जो है ।वो सब रामायण में है ।
दूसरों की सेवा और परोपकार का दूसरा नाम है “पूजा”
सब कुछ भगवान है ,ऐसा स्वीकार कर लेना सर्वश्रेष्ठ साधन है ।
संसार में जो है ।वो सब रामायण में है ।
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