जालंधर में बच्चा गायब, पुलिस ने लगा दिए नाके… फिर अचानक सामने आया पूरा मामला!
निस्वार्थ सेवा ही मैत्री का सात्विक आधार है ।
दूसरे के दोषों का दर्शन व चिंतन कभी न करो ।
मानव सेवा से कोई बडा धर्म नहीं ।
भगवान की अदालत में वकालत नहीं होती ।सज़ा हो जाए तो ज़मानत नहीं होती ।





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