अरुण रत्न के संकलन
*एक बेहद कटु, किंतु एक अकाट्य सत्य यह भी है कि हम चाहे कितने भी भारी-भरकम शब्दों से सजाकर सुविचारों का आदान-प्रदान करें, किंतु यदि आंखों में स्नेह, होठों पर मुस्कान, ह्रदय में सरलता और व्यवहार में करुणा एवं अपनापन नहीं है, तो सब कुछ व्यर्थ है।।
*विचार से रास्ता बनता हैं*
*और व्यवहार से जीवन*
*कर्म अच्छे किया करो*
*भक्ति तो रावण भी करता था*


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