कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं जिसके हृदय में सुमति और कुमति दोनो का वास न हो ।
थोड़ा सा यश मिला -दुनिया पर गरजने लगा है।
ये संसार कर्म फल व्यवस्था के अनुसार चलता है ॥”जैसा करोगे वैसा भरोगे “
कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं जिसके हृदय में सुमति और कुमति दोनो का वास न हो ।
थोड़ा सा यश मिला -दुनिया पर गरजने लगा है।
ये संसार कर्म फल व्यवस्था के अनुसार चलता है ॥”जैसा करोगे वैसा भरोगे “
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