Mon, 15 Jun 2026

अरुण रत्न के अनमोल संकलन

*सोच *
खूबसूरत हो तो....
 

*सब कुछ ,*
*अच्छा नजर आता है.
*कुछ वस्तुऐं केवल 'निकट' जाने पर 'बिन मांगे मिल' जाती हैं..*
*जैसे 'बर्फ से शीतलता', 'अग्नि से गर्माहट' और 'गुलाब से सुगंध'..*
*ऐसे ही 'प्रभु से मांगने' की अपेक्षा उनसे 'निकटता बनाइये', बहुत कुछ 'अपने आप मिलना' प्रारम्भ हो जायेगा.*

*कुछ वस्तुऐं केवल 'निकट' जाने पर 'बिन मांगे मिल' जाती हैं..*
*जैसे 'बर्फ से शीतलता', 'अग्नि से गर्माहट' और 'गुलाब से सुगंध'..*
*ऐसे ही 'प्रभु से मांगने' की अपेक्षा उनसे 'निकटता बनाइये', बहुत कुछ 'अपने आप मिलना' प्रारम्भ हो जायेगा.*

*मन तृप्त है..*
*तो एक बूँद भी बरसात है....*                 

*मन अतृप्त है तो..*
*समंदर की क्या बिसात है... !!*

*समंदर की क्या बिसात है... !!*


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