आज 14 मार्च की गुस्ताख़ी
एक अड्डे पर
कुछ क्षण बस रुकी,
उसे चलाने के लिए
कंडक्टर ने जोर से सीटी बजाई,
ड्राईवर ने बस आगे बढ़ाई,
तभी बस की पिछली तरफ से
एक युवती की सुरीली आवाज आई-
"ठहरिए-ठहरिए
मैं कपड़े उतार रही हूँ ।"
ड्राईवर सहित सभी यात्रियों की
निगाहों में कुछ चमक आई,
तुरंत सभी ने अपनी गर्दन
पीछे की ओर घुमाई,
लेकिन वह युवती
सभी के विचारों पर तीरमार रही थी,
बस में रखी अपने कपड़ों की
गठरी उतार रही थी । - गुस्ताख़



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