Fri, 18 Sep 2026
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जानें क्यों सुप्रीम कोर्ट ने युवक को दी इच्छामृत्यु की इजाजत, पिता ने लगाई थी गुहार

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 31 साल के युवक हरीश राणा को  इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी है। क्योंकि हरीश पिछले 13 सालों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है। यह देश में पहला मौका होगा जब सर्वोच्च अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया हो।

कौन बेटे के लिए ऐसा चाहेगा- पिता
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पिता अशोक राणा ने कहा कि हम इसके लिए लंबे समय से लड़ रहे थे। कौन से माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेंगे। पिछले 3 साल से हम यह मामला लड़ रहे थे। अब उसे एम्स ले जाया जाएगा। वह पंजाब यूनिवर्सिटी में टॉपर हुआ करता था।

2013 से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे
दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यू्निवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 2013 में वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इसकी वजह से उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। वह न कुछ बोल सकते हैं और न ही महसूस कर सकते हैं। तब से वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ही थे।

जानिए क्या होता है पैसिव यूथेनेशिया
पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हरीश की मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा की इच्छामृत्यु देने की अपील पर सुनाया।

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