पंजाब सरकार का चुनावी बजट जमीनी हकीकत से कोसो दूर - इंजी. अरुण रत्न
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में निकाली जा रही 'कन्याकुमारी से कश्मीर' यात्रा आज जालंधर के परागपुर पहुंची, जहां स्थानीय किसानों ने उनका भव्य स्वागत किया।
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए डल्लेवाल ने बताया कि उनकी इस यात्रा को देशभर के लोगों का भरपूर प्यार और समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस यात्रा के उद्देश्यों से प्रभावित होकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों की किसान जत्थेबंदियां भी अब उनके साथ जुड़ चुकी हैं, जिससे किसानों की आवाज और अधिक मजबूत हो गई है।
पंजाब सरकार के बजट और सुरक्षा पर सवाल
पंजाब के हालिया बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए डल्लेवाल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने महिलाओं के खातों में एक हजार रुपये डालने की घोषणा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह केवल आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया एक चुनावी स्टंट है और महिलाएं भी सरकार की इस मंशा को अच्छे से समझती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई। डल्लेवाल ने कहा कि पंजाब में अब आए दिन कत्ल और सरेआम गोलियां चलने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे आम नागरिक अपने घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगा है। उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह के सुरक्षित शासन की तुलना वर्तमान असुरक्षित माहौल से करते हुए कहा कि आज के बजट में कानून व्यवस्था को लेकर कोई ठोस योजना नहीं दिखती।
खेलों में राजनीति और महिला खिलाड़ियों का अपमान
टी-20 विश्व कप में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत पर युवाओं को बधाई देते हुए डल्लेवाल ने एक गंभीर पहलू की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर हमारे खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खेलों में बढ़ती राजनीतिक दखलअंदाजी खेल भावना को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने महिला खिलाड़ियों के साथ हुए कथित अपमानजनक व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पूरे देश ने देखा है कि राजनीतिक स्वार्थ के चलते हमारी बेटियों के साथ कैसा बर्ताव किया गया।
खेती को कॉरपोरेट के हवाले करने की साजिश
केंद्र सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए किसान नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली की सरकार खेतीबाड़ी क्षेत्र से आम किसानों को बाहर निकालने की योजना पर काम कर रही है। डल्लेवाल ने कहा कि सरकार का असली लक्ष्य कृषि को बड़े कॉरपोरेट घरानों और कारोबारियों के हाथों में सौंपना है, ताकि किसानों को सस्ती मजदूरी करने के लिए मजबूर किया जा सके। शंभू बॉर्डर पर लगे धरने का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक किसानों की जायज मांगें नहीं मानी जातीं, उनका संघर्ष और यह यात्रा इसी तरह जारी रहेगी।



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