खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से मार्च का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। फरवरी में हुए सूर्य ग्रहण के बाद अब 3 मार्च, मंगलवार को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है। विशेष बात यह है कि इस बार चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के शुभ अवसर पर पड़ रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 2 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगा और शाम 5 बजकर 33 मिनट तक जारी रहेगा। वैज्ञानिकों के लिए जहाँ यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, वहीं ज्योतिषियों के अनुसार इसका व्यापक असर देश-दुनिया और सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा।
धार्मिक मान्यताएं और सूतक काल का गणित
हिंदू परंपराओं में ग्रहण काल को एक संवेदनशील और अशुभ समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि ग्रहण भारत में दृश्य होता है, तो सूतक काल के नियम कड़ाई से लागू होते हैं। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या शुभ कार्य वर्जित होते हैं। चूंकि यह ग्रहण होली के दिन पड़ रहा है, इसलिए लोग इस असमंजस में हैं कि होलिका दहन की पूजा पर इसका क्या असर होगा। यदि चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह समा जाता है, तो दुनिया के कई हिस्सों में 'ब्लड मून' का अद्भुत नजारा भी देखने को मिलेगा।
क्या भारत में दिखेगा ग्रहण का असर
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा की स्थिति का गहरा महत्व है। यदि यह चंद्र ग्रहण भारत के भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई देता है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल प्रभावी रहेगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 17 मिनट की होगी। विद्वानों का कहना है कि ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ होता है, जबकि भोजन करने या सोने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लेकर विज्ञान प्रेमियों और धार्मिक अनुयायियों दोनों में काफी उत्सुकता बनी हुई है।



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