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भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील और केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के विरोध में आज जालंधर के श्रीराम चौक पर ज़ोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। 'ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन' (AIBEA) के आह्वान पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए काम-काज ठप रखा।
बैंक कर्मियों की मुख्य मांगें: भर्ती और छुट्टियों का मुद्दा
धरने के दौरान डिप्टी जनरल सेक्रेटरी विनोद शर्मा ने स्पष्ट किया कि बैंकों में लंबे समय से क्लर्क और सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती नहीं की जा रही है, जिससे मौजूदा स्टाफ पर बोझ बढ़ गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शनिवार की छुट्टी का आधिकारिक ऐलान होने के बावजूद इसे अब तक लागू नहीं किया गया है, जो कर्मचारियों के साथ वादाखिलाफी है।
मजदूरों के लिए जहर हैं 4 नए लेबर कानून
यूनियन नेता हरविंदर सिंह ने कहा कि यह केवल बैंकों की हड़ताल नहीं है, बल्कि देश के सभी विभागों के मजदूरों का साझा संघर्ष है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 29 लेबर कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जॉब सिक्योरिटी का संकट: कर्मचारियों को पक्की नौकरी के बजाय ठेका प्रथा (कॉन्ट्रैक्ट) पर धकेला जा रहा है।
उन्होंने अग्निवीर योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सैनिक कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद बेरोजगार हो रहे हैं, वैसा ही हाल अन्य विभागों में करने की तैयारी है। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार को जगाने के लिए यह एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की गई है।


