Tue, 04 Aug 2026
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लड़कियों की सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी स्कूलों में मेन्स्ट्रुअल सुविधा अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था हर हाल में लागू की जानी चाहिए।

केंद्र और राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि सभी स्कूलों में दिव्यांगों के अनुकूल शौचालय बनाए जाएं। इसके साथ ही लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। अदालत ने कहा है कि इन बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की गरिमा और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है।

आदेश न मानने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई
कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि जो स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि स्कूलों में स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। यह फैसला मेन्स्ट्रुअल हाइजीन पॉलिसी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया गया है। इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में पिछले तीन वर्षों से सुनवाई चल रही थी, जिसके बाद अब अंतिम फैसला सामने आया है।

2024 में दाखिल हुई थी जनहित याचिका
इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ने वाले असर को उजागर किया गया था। इसमें कहा गया था कि पीरियड्स के दौरान जरूरी सुविधाएं न होने और सैनिटरी पैड खरीदने में असमर्थता के कारण कई छात्राएं स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। मासिक धर्म के दिनों में कपड़े का इस्तेमाल कर स्कूल जाना उनके लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।

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