Mon, 14 Sep 2026
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गुप्त नवरात्रे


 माघ माह के गुप्त नवरात्रि की शुरुआत आज 19 जनवरी से होने वाली है। इसका समापन 27 जनवरी को है। इस दौरान घट स्थापना के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 19 जनवरी की सुबह 6 बजकर 43 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो ये सुबह 11 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 36 मिनट तक रहने वाला है।


गुप्त नवरात्रि का संबंध 10 महाविद्या की साधना से जुड़ा है। ये तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनकी 10 महाविद्याओं को पूजने से जिंदगी की बाधाएं खत्म होती हैं और मनोकामना की पूर्ति होती है।  
यह पूजा जितनी गुप्त रखी जाए, वो उतनी ही सफल होती है।
देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है।
इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्र
वैसे तो इन नवरात्रि में भी उन्हीं नौ माताओं की पूजा आराधना होती है वहीं दशहाविद्या साधना का भी शुभ साधना काल माना जाता है.
गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं। 
भगवान विष्णु शयन काल की अवधि के बीच होते हैं तब देव शक्तियां कमजोर होने लगती हैं।
उस समय पृथ्वी पर रुद्र, वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लगता है इन विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती है।
पूजन विधि: 
गुप्त नवरात्रि पर्व के दिनों में सुबह जल्द उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
देवी पूजन की सभी सामग्री को एकत्रित करें। पूजा की थाल
 सजाएं।
मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में सजाएं।
मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें।
पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। 
इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें। 
फिर कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा के माध्यम से उसे बांधें। 
अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें।
फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें।
पूरे परिवार सहित माता का स्वागत करें, उनका पूजन, आरती करके भोग लगाएं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें।
नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें पूरी, चना, हलवा का भोग लगाएं। दक्षिणा दे।
गुप्त नवरात्रि अंतिम दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें। 
मां की आरती गाएं, उन्हें फूल, अक्षत चढ़ाएं और बेदी से
 कलश को उठाएं। जल को पूरे घर में छिड़के.
इस तरह नवरात्रि के पूरे दिनों में मां की सात्विक आराधना 
करें।

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