Mon, 16 Mar 2026
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कानून से ऊपर कोई नहीं: SHO भूषण कुमार मामले में ढिलाई पर फंसे DSP बल, बाल आयोग ने कार्रवाई में देरी का उठाया सवाल

जालंधर के फिल्लौर थाना SHO भूषण कुमार के खिलाफ एक नाबालिग से जुड़े मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर पंजाब राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के चेयरमैन कंवरदीप सिंह ने इस मामले में फिल्लौर के डीएसपी सरवन सिंह बल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है।

कार्रवाई में जानबूझकर देरी को लेकर उठे सवाल
बाल आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि SHO भूषण कुमार पर जिस प्रकार के आरोप थे, उनके तहत समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने निर्देश दिया है कि कार्रवाई में हुई देरी की जिम्मेदारी तय की जाए और इस ढिलाई के लिए संबंधित अधिकारियों पर भी मुकदमा दर्ज किया जाए।

चेयरमैन ने बताया कि डीएसपी बल को अपना पक्ष रखने के लिए आयोग के सामने उपस्थित होने का मौका दिया गया था, लेकिन वे समय पर उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की गई। हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और डीएसपी चाहें तो बाद में आयोग के सामने अपनी सफाई दे सकते हैं।

SHO भूषण पर अश्लील हरकतें करने का आरोप
यह पूरा मामला SHO भूषण कुमार पर एक नाबालिग के साथ अश्लील हरकतें करने और एक महिला से वीडियो कॉल पर अभद्र बातचीत करने के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। डीएसपी पर आरोप है कि उन्होंने इन संवेदनशील मामलों में कार्रवाई करने में जानबूझकर ढिलाई बरती।

आयोग ने होम सेक्रेटरी को लिखे पत्र में डीएसपी सरवन सिंह बल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट-2012 की धारा 21 (अपराध की रिपोर्टिंग में विफलता या देरी) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 199 (कानून द्वारा अपेक्षित लोक सेवक द्वारा जानकारी का खुलासा न करना) के तहत एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की है। 

कोई भी पुलिस अधिकारी कानून से ऊपर नहीं
मामले पर अपना पक्ष रखते हुए डीएसपी फिल्लौर सरवन सिंह बल ने कहा कि SHO भूषण पर लगे आरोपों पर कार्रवाई की जा चुकी है। वह अपना पक्ष बाल आयोग के चेयरमैन के सामने पेश करेंगे और जांच के बाद जो भी धाराएं बनती थीं, उन्हीं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

वहीं, बाल आयोग ने जोर देकर कहा कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी पुलिस अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है।


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