ਜਿਸ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਸ਼ਹਿਰ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰਾ ਰੱਖਣ ਦੀ ਉਸਦੇ ਮੇਨ ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਾਥਰੂਮਾਂ ਦਾ ਬੁਰਾ ਹਾਲ ਹੈ ।
तुम्हारे आंसू ही विश्व को समाप्त कर सकते हैं।।
वह जाति, संप्रदाय ,राष्ट्र नष्ट हो
जाता है जो अपने कर्तव्य के बारे में प्रमाद करता है।
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मृत्यु एकांत में बैठकर एक दिन रोने लगी ब्रह्मा जी ने आंखों से गिरते हुए आंसुओं को बटोर लिया और बोले बस बस बेटी तुम्हें कोई वरण करें या ना करें, लोगों को तेरा पता ही नहीं लगेगा तू निराकार हो जाएगी ,ंतेरे आंसू की बूंदे संसार में रोग बनेगी ,जिसमें टी .वी ,दमा ,बुखार ,जुखाम और तरह तरह के रोग होंगे ।इसीलिए स्त्री को कभी उलाहना देते हैं तो लोग कहते हैं कि देवी तुम्हारे आंसू ही मारने के लिए बहुत काफी है, तुम और क्या करोगी तुम्हारे को अस्त्र-शस्त्र प्रयोग करने की जरूरत नहीं।देवी तुम्हारे
आंसू ही संसार को मारने के लिए पर्याप्त है, मौत तो कहीं दिखती नहीं महाभारत में कहा गया है।
(प्रमादं वै मृत्यु अहं ब्रवीमि)
मनुष्य के जीवन में प्रमाद आए भगवान से और कर्तव्य से शतपथ और सत्संग से जब वह विमुख हो जाए तो समझ लीजिए कि मृत्यु उसके सिर पर नाच रही है । बिना मृत्यु का आवेश हुए कोई भला मार्ग नहीं छोड़ता ,वह जाति संप्रदाय राष्ट्र नष्ट हो जाता है जो अपने कर्तव्य के बारे में प्रमाद करता है ।जो मृत्यु के चंगुल में रहेगा निश्चय ही वह प्रमाद करेगा ।वह मृत्यु से मुक्त होकर अमृत तत्व की प्राप्ति के लिए प्रयत्न कैसे करेगा।






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