सर्दियों का मौसम आते ही श्रीनगर-कारगिल-लेह हाईवे बर्फबारी की वजह से बंद हो जाता है. जब बर्फबारी रुक जाती है तो सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) डोजर व अन्य उपकरणों की मदद से बर्फ हटाने का काम करता है. लेकिन आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि इस काम में बीआरओ को गाइड एक स्थानीय निवासी करता है जो न बोल पाता है और न ही सुन सकता है. दिलचस्प बात यह भी है कि वो पढ़ा लिखा भी नहीं है. इसके बावजूद बीआरओ टीम का बर्फ हटाने में नेतृत्व करता है. आइए जानें कौन है वो दिव्यांग और बीआरओ उस पर भरोसा क्यों करती है?
श्रीनगर-कारगिल-लेह हाईवे पर जोजिला पास सबसे ऊंचा है, जिसकी समुद्रतल से ऊंचाई 11650 फीट है. सर्दियों का मौसम आते ही यहां पर बर्फबारी शुरू हो जाती है और पूरा हाईवे बर्फ से ढक जाता है. लेह कारगिल से श्रीनगर का संपर्क सड़क मार्ग से कुछ माह के लिए कट जाता है. हालांकि पहले की तुलना में अब यह हाईवे अब कम दिनों के लिए बंद होता है. चूंकि बार्डर इलाका है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से यह हाईवे बहुत महत्वपूर्ण है. बॉर्डर इलाकों की सड़कों का निर्माण और देखरेख बीआरओ ही करता है. बर्फबारी कम होते ही बर्फ हटाने का काम बीआरओ शुरू करता है. इसमें संगठन की मदद दिव्यांग व्यक्ति करता है.



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