जी हां !भूत प्रेत होते हैं
विज्ञान के द्वारा समय-समय पर प्रस्तुत किए गए हजारों तर्कों कुतर्कों के बावजूद मानव मन इस बात को लेकर उलझा हुआ है की भूत प्रेत होते हैं अथवा नहीं मजेदार बात यह है कि भूत प्रेत के होने ना होने की इस उलझन को कोई अंतिम निर्णय तक पहुंचने भी नहीं देना चाहता क्योंकि भूत-प्रेत के अस्तित्व को लेकर हजारों वर्षों से चली आ रही उलझन ही तो रोचक है मजेदार है गांव में अलाव के सामने जाड़े की अंधियारी रात में भूत प्रेत के कितने किस्से हम सुनते रहते हैं चौपालों से निकलकर परा मनोवैज्ञानिकों द्वारा लिखे गए शोध ग्रंथों में ना सिर्फ दर्ज हो गए हो बल्कि देशी-विदेशी फिल्मों और टीवी धारावाहिकों के लिए बिकाऊ माल भी बन गए हैं भूत अब भूत नहीं रहे वर्तमान को चमकाने की व्यापारिक कला भी बन गए हैं।
परामनोवैज्ञानिक के एक महत्वपूर्ण आयाम प्रेतिकवाद के अध्ययन से पता चलता है कि भारत में वेद काल में ही भूत प्रेत के अस्तित्व का होना ना होना चर्चाओं में व्यापक विस्तार पा चुका था मृतकों की आत्मा और पितरों पूर्वजों कीइहलोक परलोक की उपस्थिति और उनके पूजन की व्यवस्थित पद्धति की स्थापना हो चुकी थी भूत प्रेत के अस्तित्व की सबसे ज्यादा चर्चा अथर्ववेद में मिलती है वही पुराण ग्रंथों के अलावा जैन और बौद्ध आगमों एवं त्रिपिटक में भूत प्रेत चर्चा में रहे हैं मध्ययुग की सभी लोकप्रिय सत्य घटनाओं में भूत-प्रेत की लोकप्रियता और रोचकता शिखर पर हैं बल्कि कहा जा सकता है कि भूत-प्रेतों के कारण ही मध्ययुग की अधिकतर गाथाएं भूत नहीं हुई हैं जहां कहीं भी किसी पुराने महल किले अथवा खंडहर की चर्चा मिलती है वहां भूत-प्रेत का होना भी लगभग तय होता है प्रेत अभिशप्त होना ही तो इन स्थानों में जान फूकता है लोक कथाओं में भूत-प्रेत पेच पैदा करते रहते हैं यह आश्चर्य है की घोर वैज्ञानिकता का दावा करने वाले यूरोप और अमेरिका का जनमानस भी प्रेत बाद जैसे आंदोलन की पकड़ में है और 19वीं सदी में भूतों की चर्चा और उसकी परिकल्पना ने खूब उड़ान भरी भूत-प्रेत काफी लोकप्रिय हुए मैंने अपनी लंदन यात्रा में स्लाव में एक ऐसा बंगला देखा जहां कोई नहीं रहता उसको रहने वाले छोड़ कर चले गए क्योंकि वहां प्रेत का वास है बहुत अच्छा घर है सब कुछ ठीक है लेकिन अब जंगल हो गया किसी की हिम्मत नहीं है वहां जाने की यह विदेशों की हाल है हमारे देश में तो अनेक जगह इस प्रकार की हैं।
आदिम युग से यह विश्वास जनमानस में जड़े जमाए हुए हैं कि भूत प्रेत एक अति प्राकृतिक शक्ति हैं जो अदृश्य रहकर भी मानव मन अथवा शरीर को प्रभावित करती हैं अनेक घटनाओं से प्रमाणित हो चुका है कि प्रेत बाधा से ग्रसित मकानों अथवा भूत बंगलों में भूत बा कायदा परिवार के साथ रहते हैं भूत प्रेतों के साहचर्य में परिवार के सदस्य प्रेत ग्रस्त मकान अथवा बंगलों में दरवाजों पर दस्तक पदचाप फुसफुसाहट अदृश्य आवाजें फर्नीचर आदि के खिसकाये जाने की आवाजें सुनाई पड़ती रही हैं प्रेत बाधाओं से ग्रस्त इन स्थानों पर रहने वाले परिवारीजनों का डर समाप्त हो गया है और वह इनके साथ रहने के अभ्यस्त हो गए उल्लेख मिलता है कि कई प्रेत ग्रस्त मकानों अथवा भूत बंगलों में रहने वाले प्रेतों ने परिवार के लोगों को संवादों के जरिए बताया कि वह एक देह बिहीन आत्मा हैं वह कभी-कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते बातूनी प्रेतों के संकेतों को आधार बनाकर जब खोज की गई तब प्रेतों द्वारा कही गई बातों को शत प्रतिशत सच पाया गया।
आज लगभग विश्व के सभी देशों के लोगों की कमोबेश यह मान्यता है कि भूत प्रेत के पास आत्मा तो होती है लेकिन स्थूल शरीर नहीं होता मृत्यु शरीर की होती है आत्मा कि नहीं आज सभी सभ्यताओं में व्यक्ति के स्थूल सूक्ष्म अथवा भौतिक अथवा पराभौतिक शरीर की चर्चा पुरे विश्वास के साथ होती है सूक्ष्म शरीर एक अदृश्य उर्जा के रुप में उपस्थित रहकर अपने आभामंडल का अनुभव करवाता रहता है और इस अवधारणा को पुष्ट करता है कि प्रत्येक प्राणी अथवा जड़ चेतन पदार्थ का अपना एक आभामंडल होता है आभामंडल शरीर में रहकर भी स्थूल जगत के संपर्क में रहती है प्रेत जगत के रहस्य को सुलझाने में लगे परामनोविज्ञान विशेषज्ञों ने आज प्रेत वाद अथवा प्रेत विद्या को अध्ययन क्षेत्र का एक नया आयाम मान लिया है आज भूत-प्रेतों से संवाद कायम करने की होड़ लगी है प्रेत लोगों के अनुभव में पॉपुलर हो रहे हैं केवल अमेरिका में ही आज दो लाख से ज्यादा प्रेत विद्या विशेषज्ञ भूत-प्रेतों का भूत भविष्य और वर्तमान का अध्ययन कर रहे हैं ब्रिटेन में भूतों के संपर्क बनाने वाले सैकड़ों समाज हैं और इनके हर आयोजनों में शामिल होने वाले दो तीन लाख लोग होते हैं।
प्रेत आत्मा से संपर्क साधने का तरीका भी सभ्यताओं में लगभग एक सा है पुरुष और महिलाएं ही प्रेत संपर्क का माध्यम बनते हैं शर्त केवल इतनी होती है कि भाव मगन व्यक्ति से प्रेत का संपर्क जल्दी होता है धीरे धीरे प्रेत संपर्क की यह प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक ट्रीटमेंट में बदल जाती है माध्यम सब कुछ भूलकर भूत-प्रेत के चंगुल में फंस जाता है इस माध्यम के जरिए ही भूत प्रेत के साथ संवाद संपर्क किया जाता है भूत प्रेत ध्वनियों अथवा संकेतों से संदेश प्रेषित करते हैं भारत में आज भी कुछ मंदिर पर पहुंचकर देखा जाए तो वहां भूत प्रेत से संवाद करते लोग मिल जाएंगे।
आत्मा अथवा शरीर का प्रेत के रुप में देखना एक अलग ही प्रेत वादी करिश्मा है इसमें कभी किसी को आत्मा का कोई अंग दिखाई पड़ता है तो कभी समूची आकृति छाया के रूप में किसी नारी अथवा पुरुष आकृति का दिखना और अचानक गायब हो जाना भूत-प्रेत के होने का सर्वमान्य प्रमाण माना गया है प्रेत विद्या के जानकार प्रेतों के माध्यम से ही तांत्रिक क्रियाओं के माध्यम से अपनी बात कह जाते हैं माध्यम जब सम्मोहित होता है तब आत्मा उस पर अपना अधिकार कर लेती है और वह माध्यम के मुंह से सत्य बोल ने लगती है भारत में देवी देवताओं को भी इन माध्यमों पर आमंत्रित किया जाता है।
कौन बनता है भूत प्रेत यह सवाल अनादिकाल से सांसद बना हुआ है इसके उत्तर पर उत्तर तलाशे गए हैं लेकिन संतोष किसी जवाब से नहीं मिला है धर्म और आध्यात्मिक व्याख्याएं सिर्फ इतना स्पष्ट करती हैं कि जीवन अनंत अवसरों का अवशेष है जन्म मरण मरण जन्म के अनेक आवर्तों का ठहराव है जीवन यह आज तक एक अबूझ सवाल है कि क्या मृत्यु के बाद भी कोई जीवन है वर्तमान जीवन क्या किसी पिछले जीवन की कड़ी है?
जैन धर्म मानता है की जन्म मरण और मरण जन्म का कारण अथवा जीवों का आयुष कर्म है किसी कर्म के सद्भाव से प्राणी जीवित रहता है और आयु के छय होने पर मर जाता है मर कर फिर पैदा होता है यह प्रक्रिया आयु कर्म द्वारा परिचालित होती है आयु कर्म के कारण ही जीव निर्धारित आयु अवधि तक देह के कारागार में रहता है मरण ही उसे देह पर्याय से मुक्ति दे सकता है। आयु कर्म जन्म के साथ ही प्रतिक्षण होने वाला अनुभव है किसी जीव की यदि किसी बाहरी कारणों से अकाल मृत्यु हो जाती है तो धर्म कहता है की उसे शेष आयु अगले जन्म में भोगना पड़ता है आयुष्य पूर्ण किए बिना जीव दूसरी योनियों में जन्म नहीं ले सकता जैन धर्म के अनुसार बंधी हुई आयु में एक क्षण भी नहीं बढ़ सकता लेकिन आयुर्वेद योग शास्त्र तंत्र शास्त्र में योगी तपस्वी कुशल वैद्य या आधुनिक युग के वैज्ञानिक आयु वृद्धि के उपाय अवश्य करते हैं लेकिन मृत्यु को रोक पाने में आज तक किसी को कोई सफलता नहीं मिली है जीवन और मरण मरण और जीवन की इस शाश्वत परंपरा के रहस्यमय संसार में होने वाले परिवर्तन से ही पुनर्जन्म का सिद्धांत प्रतिपादित होता है यह तय होता है कि प्रत्येक प्राणी को एक न एक दिन पुराने शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करना है।
भूत प्रेत भी अति जीवन धारक प्राणी है इनका किसी स्थान विशेष व्यक्ति विशेष वस्तु विशेष से प्रबल मोह आसक्ति मूर्छा लालसा आकांक्षा अथवा ईर्ष्या-द्वेष बैर विरोध द्रोह निदान आदि होता है ऐसे भूत प्रेत इन्हीं कारणों से भटकते रहते हैं।
बौद्ध धर्म मैं मानते हैं कि चुगलखोर खूनी तस्कर दगाबाज आदि व्यक्ति प्रेत योनि में पैदा होते हैं प्रेत सामान्य मनुष्य की तरह मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते बल्कि यह फूलों की शैया पर पैदा होते हैं अंतर्मुहूर्त यानी मात्र 48 मिनट में इनकी परिमित देह की रचना हो जाती है। भूत प्रेत विशिष्ट ऊर्जा संपन्न अणुओं से निर्मित होते हैं। उनमें ना हड्डी होती है न शिरा और नहीं स्नायु वे क्रम क्रमिक विकास के वशीभूत ना होकर युवा रूप में ही अवतरित होते हैं।
अकाल मृत्यु की मनोदशा से पैदा होने के कारण भूत-प्रेतों का स्वभाव प कलेश प्रिय होता है वह अपनी आकृति इतनी वीभत्स बना लेते हैं कि उन्हें देखकर भय पैदा होता है और कभी-कभी व्यक्ति भय बस मृत्यु को प्राप्त हो जाता है भूत प्रेतों के द्वारा की जाने वाली अजीबोगरीब घटनाओं की चर्चा खूब सुनने को मिलती है प्रेत बाधा की लंबी सूची में विस्मयकारी गर्भ अपहरण करने वाले प्रेतों की चर्चा थी गौरव अपहरण करने वाली भूत प्रेत एक स्त्री के गर्भ में पल रहे भ्रूण को निकालकर दूसरी स्त्री के गर्भ में स्थापित करने की चोरी हरकत करते डर पैदा करते हैं कीमती वस्तुओं को गायब कर देने वाले अथवा घर में इधर-उधर मल-मूत्र फैला देने वाले भूत प्रेत बहुतायत में मिलते हैं प्रेतों द्वारा अग्नि कांड करना एक सामान्य प्रेत चेष्ठा है।
लगभग 20 वर्ष पूर्व एक ऐसी लड़की मुझसे मिलने आई जिसे प्रेत शरीर के अंगों में अचानक सर्प बनकर काट लेता था वह फिर वह घंटों बेहोश रहती थी प्रारंभ में मैंने उस लड़की के शरीर पर नोचने काटने की घटना शरारत समझा लेकिन जब वह घटना मेरी आंखो के सामने घटित हुई और देखते देखते उसका चेहरा लहूलुहान हो गया तब मैंने उसे प्रेत चेष्टा माना तांत्रिक उपाय से आगे चलकर उस लड़की को प्रेत बाधा से मुक्त कर दिया गया हमारे धर्म ग्रंथों में 8400000 योनियों का वर्णन है उन योनियों में जीव कर्मानुसार प्रवेश पाता है प्रेतयोनि भी उसी में से एक योनि है भूत प्रेत होते हैं इसमें कोई शंका नहीं है अहंकार में लोग इसे नकारते हैं जब स्वयं उनके ऊपर इनका प्रभाव पड़ता है तब उन्हें समझ आती है और कहते हैं कि हां सच है श्रीमद् भागवत में धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिली थी मेरे पास न जाने कितने ऐसे लोग आते हैं जो प्रेत ग्रसित होते हैं उन प्रेतों को संतुष्ट करके हटाना चाहिए इस की अनेक विधियां हैं जो तंत्र शास्त्र में ही है । बस आज इतना ही।
योगीराज रमेश जी महाराज



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