Wed, 05 Aug 2026
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स्थिर वृष लग्न में करें लक्ष्मी पूजन पढ़ें पूरी खबर

स्थिर वृष लग्न में करें लक्ष्मी पूजन

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जालंधर (राजन) : दीपावली की तिथि को लेकर लोगों में काफी असमंजस है। कार्तिक अमावस्या 20 अक्टूबर, सोमवार को दोपहर 2:56 बजे से अगले दिन मंगलवार 21 अक्टूबर को शाम 4:26 बजे तक है। ऐसे में पूजा के लिए 20 अक्टूबर रात का समय ही सही है और दिवाली का पर्व इसी दिन मान्य होगा। दीपावली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर आदि देवों का पूजन किए जाने का विधान है। पूजन के लिए 20 अक्टूबर को प्रदोष काल में शाम 7:10 से रात्रि 9:06 बजे स्थिर वृष लग्न का काल मिलेगा, अत्यंत फलदायी है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय बताते हैं कि दीपावली के दिन मां लक्ष्मी का पूजन करते समय श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। जानकारी न हो तो 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र के साथ पूजन हो सकता है। 

लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें।

घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली और तोरण द्वार बनाएं।

लक्ष्मी पूजन के लिए साफ चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।

चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें और चौकी सजाएं।

 

ऐसे करें पूजन

माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की मूर्ति को वस्त्र पहनाएं और इस दौरान देवी को चुनरी अवश्य अर्पित करें।

अब साफ कलश में जल भरें और चौकी के पास रख दें।

प्रथम पूज्य देवता का नाम लेते हुए भगवान को तिलक लगाएं ।

लक्ष्मी-गणेश को फूलमाला पहनाएं और ताजे फूल देवी को अर्पित करें।

अक्षत, चांदी का सिक्का, फल और मिठाई संग भोग अर्पित करें।

आपने किसी वस्तु या सोना-चांदी की खरीदारी की है तो उसे देवी लक्ष्मी के पास रख दें।

शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं और इसके साथ ही घर के कोने में रखने के लिए कम से कम 21 दिए भी इसके साथ जलाएं।

देवी लक्ष्मी की आरती और मंत्रों का जाप करें।

अब घर के सभी कोनों में दीपक रखें और तिजोरी में माता की पूजा में उपयोग किए फूल को रख दें।

 

अमावस्या

20 अक्टूबर दोपहर 2:56 बजे शुरू होगी

21 अक्टूबर को शाम 4:26 बजे तक रहेगी

शाम 7:10 से रात्रि 9:06 बजे तक पूजन शुभ

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