धनतेरस आज..., घर लाएं सुख-समृद्धि
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जालंधर (राजन) : दीपावली से पहले आने वाला धनतेर पर्व न केवल खरीदारी का दिन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में समृद्धि, स्वास्थ्य और शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। दीपोत्सव की शुरुआत इसी दिन से होती है। इस दिन घरों में दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य और की गई खरीदारी आने वाले वर्ष के लिए सौभाग्य और सम्पन्नता का संकेत होती है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में लक्ष्मों का आगमन कराती हैं और साल भर समृद्धि बनी रहती है। लोग इस दिन नए बर्तन, सोना-चांदी, वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, आभूषण, यहां तक कि नए घर या संपत्ति की खरीद भी करते हैं।
इतिहास और पौराणिक महत्व
श्री मेला राम मंदिर मोहल्ला खोदियां के प्रमुख पुजारी पंडित भोला नाथ त्रिवेदी बताते हैं कि धनतेरस को लेकर दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए, उस दिन कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी थी। धन्वंतरि देव आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं, इसलिए इस दिन स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुओं का विशेष महत्व माना गया। दूसरीकथा राजा हिमा के पुत्र की है. जिनके जीवन पर सर्पदंश का खतरा था। उनकी पत्नी ने दीपक जलाकर, सोने-चांदी के आभूषण और सिक्कों को दरवाजे पर सजा दिया. जिससे यमराज का ध्यान उन पर न जाकर उस प्रकाश पर गया और उसके पति की आयु बच गई। तब से यह दिन यमदीपदान के रूप में भी - मनाया जाता है। इसके साथ ही पूरे घर को भी रोशन किया जाता है।
आज तीन शुभ मुहूर्त में करें खरीदारी
पहला : सुबह 8:50 बजे से सुबह 10:33 बजे
दूसरा : सुबह ॥:43 बजे से दोपहर 12:28
तीसरा : शाम पः 16 बजे से रात 8:20 बजे
क्या खरीदना शुभ
सोना-चांदी: धनतेरस पर
सोना या चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का प्रतीक है। कई लोग सिक्के या छोटे आभूषण खरीदकर घर की तिजोरी में रखते हैं।
बर्तन और धनियाः नए
बर्तन खरीदना भी परंपरा का हिस्सा है। मान्यता है कि बर्तन घर में अन्न और संपन्नता का प्रतीक हैं। परंतु इन्हें खाली घर नहीं लाना चाहिए। इसमें कुछ मिठाई, चावल या सिक्का रखकर लाना शुभ होता है।
झाडूः धनतेरस पर झाडू खरीदने की परंपरा भी रही है। इसे दरिद्रता को दूर करने और लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
इलेक्ट्रानिक सामान या वाहन : आधुनिक समय में लोग इस दिन वाहन, मोबाइल, लैपटाप और अन्य इलेक्ट्रानिक वस्तुएं भी खरीदते हैं। इसे प्रगति और आधुनिक समृद्धि का संकेत माना जा रहा है।
धन्वंतरि पूजा से जुड़ी वस्तुएं : कई लोग इस दिन तांबे या पीतल के बर्तन, तुलसी के पौधे, आरोग्य से जुड़ी जड़ी-बूटियां या पूजा सामग्री भी खरीदते हैं। यह स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है।
पूजन विधि
घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
रंगोली बनाएं और दीपक जलाएं।
पूजा स्थान पर भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
हाथ में जल लेकर संकल्प लें।
सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।
फिर देवी लक्ष्मी, कुबेर जी और धन्वंतरि जी को फल, फूल, मिठाई, हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
इस दिन खरीदी गई नई वस्तु को भी पूजा में रखें और उनकी पूजा करें। अंत में आरती करें।
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, सरसों के तेल का चार मुख वाला यम दीपक जलाएं।






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