रेहड़ी, फड़ी व रसूखदारों का फुटपाथ पर कब्जा, लोग परेशान
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जालंधर (राजन) : जालंधर शहर में सड़कों के साथ फुटपाथ तो हैं, लेकिन पैदल चलने की जगह नहीं। फुटपाथ पर अतिक्रमण पैदल चालने वाले राहगीरों के लिए बाघा बना हुआ है। फुटपाथ पर केवल रहेड़ी, फडी वालों ने ही नहीं बल्कि बड़े शोरूम भी इन जगहों पर काबिज हो गए हैं। पिछले दो वर्षों में कमिश्नरेट पुलिस ने इन कब्जाधारियों पर कड़ी कारवां की, लेकिन हालात जस के उस बने हुए हैं। लाडीवाली रोड पर फुटपाथ पर कब्जों को समस्या इतनी गहरी हो चुकी है कि इसे समाप्त करना मुश्किल हो रहा है। भगत रामदेव चौक, सर्किट हाउस रोड और जिमखाना कलम के बाहर भी रसूखदारों ने पुटपाथ का का कर रखा है।
भारत की सर्वोच्च अदालत ने पैदल राहगीरों को फुटपाथ देने का आदेश दिया है। लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। G2M एक कर फिर वे पुटपाथ हमारा है" अभियान शुरू कर रहा है। इस अभियान के हत चौक, सर्किट बहस रोड और जिनखान कलब और शहर के फुटपाथ का निरीक्षण किया गया। सभी जगह एटपाथ पर कब्जों की भरमार है, जैसे कि दुकानदारों को किसी की परवाह नहीं। जिला प्रशासन और नगर निगम ने वहां कोई कार्रवाई नहीं की। वर्ष 2003 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की जालंदर में पैदलयात्र के दरार पुलिस और जिला प्रशासन ने सभी रास्तों को बेहतर दिखे। जातं पाथी भी इस बदलाव को देखकर हैरान रह गए। इसकेबर 2004 में पर अजे को लेकर G2M के अभियान के बाद पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने फुटपाथ के कब्जाधारियों पर शिकंजा कसा ने जिससे रास्ते खुल गए और लोगों यहठ को सांस ली, लेकिन उनके जाने के बाद शहर की स्थिति फिर से वही हो गई। इससे पहले भी G2M ने वर्ष 2021 में फुटपाथ पर कमी को लेकर ने फुटपाथ हमारा है अभियान चलाया था। वहीं शहर के बुजुर्गो का कहना है कि पैदल यात्रीयों को सड़क के बीच चलना पड़ता है। जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है निगर ऐसे लोगों पर कार्रवाई करे।






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