Saturday, 31 Jan 2026

"शिव पुराण से वारों की कथा"

शिव पुराण से वार की कथा
शिव शिव शंभू,
जय हो!
औघड़ दानी शिव शंभू वैद्य है, सर्व रोग नाशक  वैद्य  समस्त औषधियों के भी औषध हैं ,महामृत्युंजय मंत्र शिव का ही है, शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने पहले  कल्पना की  वारों की. सबसे पहले उन्होंने अपना वार बनाया सोम-वार फिर दूसरे नंबर पर अपनी माया शक्ति मां का वार बनाया मंगलवार जोके संपत्ति और  पराक्रम प्रदाता है जन्म काल से दुर्गति ग्रस्त बालक की रक्षा के लिए बुधवार बनाया, इसीलिए बुध को युवराज भी माना जाता है फिर उन्होंने आलस्य और पाप की  निवृत्ति और ज्ञान के लिए, आशीर्वाद के लिए बनाया भगवान विष्णु का वार वीरवार ,उसके बाद पुष्टि और रक्षा के लिए आयु कर्ता परमेष्ठी ब्रह्मा का आयुष कारक वार बनाया शुक्रवार
इसके बाद लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देने के लिए  इंद्र और यम का वार बनाया यह दोनों वार क्रमशः भोग देने वाले और मृत्यु भय को दूर
 करने वाले हैं।
फिर ,महादेव ने सूर्य आदि ग्रहों को सातों वारों का स्वामी निश्चित किया सोमवार के स्वामी चंद्र है जोके महादेव के सर पर शोभायमान हैं शक्ति संबंधी वार के स्वामी मंगल है , कुमार संबंधी वार के स्वामी बुध ,ज्ञान के स्वामी विष्णु जी वीरवार के स्वामी बने ,इंद्र वार के स्वामी शुक्र और यम वार के स्वामी शनि देव बने और रविवार के स्वामी सूर्य 
बने, अपने-अपने वार में की हुई उन देवताओं की पूजा विशेष रुप से फलित होती है, सूर्य आरोग्य दायक और चंद्रमा मन की शांति के कारक है मंगल मंगल दायक पराक्रम दायक है बुध पुष्टि देते हैं बुद्धि देते हैं, गुरु आयु की वृद्धि करते हैं और  शुक्र भोग देते हैं, ऐश्वर्या देते हैं शनिवार के देव शनिचर मृत्यु का निवारण करते हैं
17जुलाई  2023 को शिव के प्रिय मास सावन का दूसरा सोमवार है ,इस दिन शिव पूजा का महत्त्व सर्व ज्ञाता है. पार्थिव  शिवलिंग की पूजा अनेक यज्ञों  का फल देने वाली है ,भोग और मोक्ष प्रदाता है. विधिपूर्वक भगवान शंकर का नैवेद्य आदि से पूजन करके उनकी त्रिभुवन  मई 8 मूर्तियों का भी पूजन करें ,पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश सूर्य चंद्रमा तथा यजमान यह भगवान की 8 मूर्तियां कहीं गई है फिर सिर्फ महादेव के  शर्व भव रूद्र उग्र भीम ईश्वर महादेव और पशुपति इन नामों की भी अर्चना करें और पूजा करें शिव परिवार की जिसमें ईशान ,नंदी, चंड,
महाकाल ,भरिनगी और वृष ,स्कंध , कपरदीश्वर, सोम और शुक्र यह 10 शिव परिवार माने गए हैं, जो के ईशान आदि दसों दिशाओं में पूजनीय है फिर भगवान शिव के समक्ष वीरभद्र का और पीछे कीर्ति म मुख का पूजन करके विधिपूर्वक 11 रुद्रो की पूजा करें फिर पंचाक्षर मंत्र का जप करें . हर 
हर महादेव !


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