Wed, 05 Aug 2026
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भगत कबीर जी ने मन को किसान, शरीर को खेत, और कर्म को बीज वता कर समझाया है कि कर्मो के अनुसार ही फल होता है : योगीराज रमेश जी 

तुलसी' काया खेत है, मनसा भयौ किसान। पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥"

  हमारा शरीर एक खेत की तरह है और मन किसान है। हम जो भी कर्म (पाप या पुण्य) करते हैं, वे इस खेत में बीज की तरह बोए जाते हैं, और अंततः हमें उसी के अनुसार फल मिलता है।

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