Sat, 31 Oct 2026
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ये मरना जीना भी शायद

ये मरना जीना भी शायद मजबूरी की दो लहरें हैं

कुछ सोच के मरना चाहा था कुछ सोच के जीना चाहा है

सहर अंसारी

 

मिरी अपनी और उस की आरज़ू में फ़र्क़ ये था

मुझे बस वो उसे सारा ज़माना चाहिए था

बुशरा एजाज़

 

उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे

वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे

कुमार विश्वास

 

इस आरज़ी दुनिया में हर बात अधूरी है

हर जीत है ला-हासिल हर मात अधूरी है

अंबरीन हसीब अंबर

 

ख़ुद अपनी शय पे अधूरा है इख़्तियार मुझे

गिरा तो सकता हूँ आँसू उठा नहीं सकता

ख़ालिद नदीम बदायूनी

 

न इतराओ अपने हुनर पर लोगों 

नफ़रतें लाखों ऐब ढूँढ लेती हैं

प्रियंवदा पाण्डेय

 

बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें

तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी

वसीम बरेलवी

 

अगर हर हाल में ख़ुश रहना फ़न है

तो फिर सब से बड़ा फ़नकार हूँ मैं...

रहमान फ़ारिस

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