सीधी जिले मे भ्रस्ट्राचार नही करने दूंगा चाहे पत्नी ही सरपंच क्यों न हो : यज्ञ नारायण तिवारी
दिल के कोने में जज़्बात जलते रहे,
बेवजह, बेसबब सुलगता रहे ।
कभी हँसी में छुपकर मुस्काए ,
कभी खामोशियों में पिघलते रहे ।
मैंने चाहा कि लफ्ज़ों में ढाल लूँ,
इन्हें कोई शक्ल, कोई नाम दूँ।
पर ये बेज़ुबान,
हर दफ़ा मेरी सोच से फिसलते रहे।
शायद यही है मिज़ाज इनका ,
हर दर्द को ज़िंदा रखते हैं।
जज़्बात नहीं, ये शोले हैं,
जो हर हाल में जलते रहते हैं।
*कंचन "श्रुता"*


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