Wed, 18 Mar 2026
G2M is a social Media platform which is designed for journalists, bloggers, and content creators Join it G2M is a social Media platform which is designed for journalists, bloggers, and content creators Join it

मनुष्यों में यदि क्षमा है, तो कवच की क्या आवश्यकता है और यदि क्रोध है तो शत्रुओं की क्या आवश्यकता है : योगी राज रमेश जी

नीति शतक का श्लोक 


 यदा किञ्चिज्ज्ञोऽहं गज इव मदान्धः समभवं तदा सर्वज्ञोऽस्मीत्यभवदवलिप्तं मम मनः। यदा किञ्चित्किञ्चिद् बुधजनसकाशादवगतं तदा मूर्खोऽस्मीति ज्वर इव मदो मे व्यपगतः।।

जब मैं अल्पज्ञ या अज्ञानी था तब हाथी के मद की तरह अभिमान से अन्धा था और खुद को सर्वज्ञ समझता था परन्तु जब मैं विद्वान लोगों के संसर्ग में आया तब मेरा वह गर्व ज्वर की भांति उतर गया और मुझे भासित होने लगा कि मैं मूर्ख हूँ।
 

-----------------------------------------------------------------------

किं श्रिया किं कामेन कृतिमहितैः ।
दिनैः कटिप्यैरेव कालः सर्वं निकृन्तिति ॥

लक्ष्मी, राज्य, कामना, ये सब किस काम के ? थोड़े समय में काल सब फाड़ खाएगा!

-------------------------------------------------------------------

क्षान्तिश्चेत्कवचेन किं किमरिभिः क्रोधोऽस्ति चेद्देहिनां ज्ञातिश्चेदनलेन किं यदि सुहृद् दिव्यौषधैः किं फलम्। किं सर्पैः यदिदुर्जनाः किमु धनैः विद्याऽनवधा यदि व्रीडा चेत्किमु भूषणैः सुकविता यद्यस्ति राज्येन किम्।।

मनुष्यों में यदि क्षमा है, तो कवच की क्या आवश्यकता है और यदि क्रोध है तो शत्रुओं की क्या आवश्यकता है, बन्धुजन है तो अग्नि की क्या आवश्यकता है। यदि मित्र है तो दिव्यौषधियों की क्या आवश्यकता है, दुर्जन है तो सर्पों की क्या आवश्यकता है, निर्दोष विद्या है तो धन की क्या आवश्यकता है लज्जा है तो आभूषणों का क्या काम है और यदि सुन्दर कविता लेखन क्षमता हो तो राज्य से क्या प्रयोजन।


119

Share News

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 147435