Tue, 20 Oct 2026
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देश काल और पात्र को देखकर दान देना चाहिए : योगिराज रमेश जी

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्।

दान देना उचित है लेकिन देश काल और पात्र को देखकर दान देना चाहिए कुपात्र को दान देने से नरक की प्राप्ति होती है सुपात्र को जो उसे दान का सदुपयोग करें देश के लिए समाज के लिए उस व्यक्ति को आनंद और स्वर्ग की प्राप्ति होती है दान सदैव सुपात्र को देना चाहिए।

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मधुर बचन तैं जात मिट उत्तम जन अभिमान। 

तनिक सीत जल सौं मिटै जैसे दूध उफान॥ 

मधुर वाणी के प्रभाव से बड़े−बड़ों का अभिमान भी मिट जाता है जिस प्रकार थोड़े से ठंडे पानी के छींटे देने से उबलता हुआ दूध भी शांत हो जाता है। अर्थात् दुष्ट व्यक्ति के घमंड को मधुर वाणी से ही मिटाया जा सकता है, उससे लड़ने−झगड़ने से नहीं।

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