Tue, 20 Oct 2026
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मन रूपी किसान शरीर रूपी ज़मीन में बीज वोता है, जैसा बीज होगा वैसा ही फसल होगी।

‘तुलसी’ काया खेत है, मनसा भयौ किसान। 
पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥ 

 गोस्वामी जी कहते हैं कि शरीर मानो खेत है, मन मानो किसान है। जिसमें यह किसान पाप और पुण्य रूपी दो प्रकार के बीजों को बोता है। जैसे बीज बोएगा वैसे ही इसे अंत में फल काटने को मिलेंगे। भाव यह है कि यदि मनुष्य शुभ कर्म करेगा तो उसे शुभ फल मिलेंगे और यदि पाप कर्म करेगा तो उसका फल भी बुरा ही मिलेगा।

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