कोलकाता में,
अचानक एक दिन
एक चीख ने सनाटे को चीर दिया
नारी के सम्मान पर
एक और जख्म ने वार किया
इंसानियत शर्मसार हुई
एक और अस्मत तार - तार हुई ।
नारी का सम्मान खो गया
दिल में ऐसी घात लगी
जिस धरती पर पूजी जाए देवी
वहां बेटी पर यह गाज गिरी।
कब तक बहेगा रक्त ?
कब तक यूं ही चीखेगी बेटियां ?
चुप्पी तोड़ो
न्याय की खातिर
अपनी आवाज़ बुलंद करो ,
आवाज़ हो .... इंसाफ की
महिला के सम्मान की ,
इस जघन्य अपराध के पीछे के
दोषियों को सज़ा के गुहार की ,
जागो ,
ताकि फिर कोई ऐसा अपराध न हो,
हर महिला को सम्मान मिले
और
एक सशक्त समाज हो ।
*कंचन"श्रुता"*????



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