Mon, 15 Jun 2026

काव्य संकलन

कोलकाता में,  
अचानक एक दिन 
एक चीख ने सनाटे को चीर दिया
नारी के सम्मान पर 
एक और जख्म ने वार किया
 इंसानियत शर्मसार हुई 
एक और अस्मत तार - तार हुई ।

नारी का सम्मान खो गया 
दिल में ऐसी घात लगी 
जिस धरती पर पूजी जाए देवी 
वहां बेटी पर यह गाज गिरी।

कब तक बहेगा रक्त ?
कब तक यूं ही चीखेगी बेटियां ?

चुप्पी तोड़ो 
न्याय की खातिर 

अपनी आवाज़ बुलंद करो ,
आवाज़ हो .... इंसाफ की 
महिला के सम्मान की ,

इस जघन्य अपराध के पीछे के 
 दोषियों को सज़ा के गुहार की ,

जागो , 
ताकि फिर कोई ऐसा अपराध न हो,
हर महिला को सम्मान मिले 
और  
एक सशक्त समाज हो ।

*कंचन"श्रुता"*????


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