Thursday, 29 Jan 2026

"ये कार्यकर्ता किसका है" पार्टी का? नेता का? या भीड़ का एक हिस्सा है?

जालंधर (विक्रांत मदान)30april 24:-  कल जब रेलवे स्टेशन किसी कवरेज के लिए हम गए हुए थे वहां कवरेज करने के बाद एक इंटरव्यू लिया, जिसके बाद मैं और मेरी टीम कुछ थके से महसूस कर रहे थे गर्मी तो बहुत थी लेकिन चाय पीने को मन हुआ, इतना मौसम ने अपना रुख बदला ठंडी हवा चलने लगी चाय का मजा दोगुना होने लगा, रेलवे ट्रैक पर कोई रेल नहीं थी बाल्की शांति थी दूर ट्रैक की तरफ से बस ठंडी हवा तेजी से बह रही थी हमने चाय वाले से चाय बनवायी, हवा के साथ बूंदा बांदी होने लगी इतने में हमारे  बगल में दो बुजुर्ग जो के जेंटलमैन थे आ कर बैठ गए कुछ बातें करने लगे यूं तो  किसी की बातें सुन्नी नहीं चाहिए,पर उन सरदार जी की बात दिलचस्प लगने लगी ना चाहते हुये हम चुपचाप उनकी बात सुनते रहे। वो दोनो आपस में बात कर रहे थे की......

 

  "यार मैनु उमर लंग गई ए.बी.सी पार्टी नाल कम करदेया हमारा लीडर फ्लाना सिंगा असां कठेया पार्टी दे पोस्टर लाए पार्टी दे कम कित्ते, जब पहली बार उसने उस समय पार्षद का चुनाव लड़ा था, तो उस समय टिकट मुझे भी मिल रहा था, पर दोस्ती के नाते मैं बीच नहीं आया बल्कि  टिकट उहनू  दिवा दिती। फ़िर वो एम.एल.ए बना फेर अग्गे ते अग्गे, ते मैं कार्यकर्ता बन्न के ही कम्म करदा रेहा। लेकिन आज यार वो पार्टी ड्रॉप कर गया, ओह किसे होर पार्टी विच शामल हो गया।

 

(सरदार जी की आंख भारी हुई थी) यार मैनु एह  बता के मैं क्या करूं क्या मैनु अपने दोस्त ओस नेता के पीछे चला जाऊं या उस पार्टी के साथ ही रहूं जिसे सारी उमर दे दी। यार इस बार मेरा मन है के अब मैं चुनाव लडू लेकिन कोन सी पार्टी से, क्या इस पार्टी से जिसे सारी उमर दे दी इतने शायद उनकी ट्रेन आ गई और वो बात करते हुए चले गए।

 

जी हाँ उनकी बातें सुनते हुए हम सोचने लगे कि भाई "कार्यकर्ता किसका है" क्या पार्टी का जिसके वो झंडे ,पोस्टर और नारे लगाता रहा  या फिर उस नेता का जो पार्टी छोड़ गया....इतने ही हमने देखा कि हमारे चाय के कप खाली है बारिश भी रुक गई है और हमने अपना सामान संभालते हुए वापसी की।


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