Friday, 30 Jan 2026

काव्य संकलन "श्रुता"

भले लगते हैं स्कूलों की यूनिफार्म में बच्चे
कँवल के फूल से जैसे भरा तालाब रहता है

मुनव्वर राना

खिलौनों की दुकानों की तरफ़ से आप क्यूँ गुज़रे
ये बच्चे की तमन्ना है ये समझौता नहीं करती

मुनव्वर राना

दहलीज़ पे रख दी हैं किसी शख़्स ने आँखें
रौशन कभी इतना तो दिया हो नहीं सकता

मुनव्वर राना

जिन आँखों से मुझे तुम देखते हो
मैं उन आँखों से दुनिया देखता हूँ

रसा चुग़ताई


24

Share News

Login first to enter comments.

Latest News

Number of Visitors - 133043