Thu, 05 Nov 2026
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'हनुमान चालीसा' के नित्य पाठ से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा-अर्चना के अपनी समस्त परेशानियों से मुक्ति पा सकता है।

                          ****** हनुमान चालीसा ****

हनुमान चालीसा' गोस्वामी तुलसीदास की काव्यात्मक धार्मिक कृति है, जिसमें भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान का गुणगान किया गया है।

'हनुमान चालीसा' के नित्य पाठ से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा-अर्चना के अपनी समस्त परेशानियों से मुक्ति पा सकता है।

 सम्पूर्ण भारत में 'हनुमान चालीसा' का पाठ बेहद लोकप्रिय है, किन्तु विशेष रूप से उत्तर भारत में यह बहुत प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय है। लगभग सभी हिन्दुओं को यह कंठस्थ होती है।

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं अनुसरण करने योग्य  कृति है। यह कृति भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान को समर्पित है, जिसमें उनके गुणों आदि का बखान किया गया है। हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु 'हनुमान चालीसा' का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसका पाठ सनातन जगत में जितना प्रचलित है, उतना किसी और वंदना या पूजन आदि में नहीं दिखाई देता।

 'श्री हनुमान चालीसा' के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। इसीलिए 'रामचरितमानस' की भाँति यह हनुमान गुणगाथा फलदायी मानी गई है। यह अत्यन्त लघु रचना है, जिसमें पवनपुत्र हनुमान की सुन्दर स्तुति की गई है। बजरंग बली‍ की भावपूर्ण वंदना तो इसमें है ही, साथ ही भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में उकेरा गया है।

गोस्वामी तुलसीदास ने राम भक्ति के द्वारा न केवल अपना ही जीवन कृतार्थ किया वरन्‌ समूची मानव जाति को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ दिया।

 तुलसीदास जी कि 'हनुमान चालीसा' अमर कृतियों में गिनी जाती है। संवत 1554 को श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अवतरित गोस्वामी तुलसीदास ने सगुण भक्ति की राम भक्ति धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि आज गोस्वामी जी राम भक्ति के पर्याय बन गए हैं।

 यह गोस्वामी तुलसीदास की ही देन है, जो आज भारत के कोने-कोने में 'रामलीला' का मंचन होता है। कई संत राम कथा के माध्यम से समाज को जागृत करने में सतत्‌ लगे हुए हैं। तुलसीदास जी 'रामचरितमानस' के ही नहीं अपितु विश्व में सबसे ज्यादा पड़ी जानें वाली प्रार्थना 'हनुमान चालीसा' के भी रचियता थे।

उत्तर प्रदेश में चित्रकूट के राजापुर में तुलसीदास की जन्म स्थली में आज भी उनके हाथ का लिखा 'रामचरितमानस' ग्रंथ का एक भाग 'अयोध्याकांड' सुरक्षित है। इसके दर्शन के लिये पूरी दुनिया से लोग आते हैं। तुलसीदास की 11वीं पीढी के लोग एक धरोहर की तरह इसे संजो कर रखे हुये हैं। 

कभी अपने परिवार से ही उपेक्षित कर दिये गये अबोध राम बोला आज पूरे विश्व में भगवान की तरह पूजे जाते हैं। संत तुलसीदास चित्रकूट में अपने गुरु स्थान नरहरिदास आश्रम पर कई वर्षो तक रहे और यहाँ पर उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व उनके भ्राता लक्ष्मण के दो बार साक्षात् दर्शन भी किये थे।

यद्यपि पूरे भारत में 'हनुमान चालीसा' का पाठ लोकप्रिय है, किन्तु विशेष रूप से उत्तर भारत में यह बहुत प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय है। लगभग सभी हिन्दुओं को यह कंठस्थ होता है। कहा जाता है कि इसके पाठ से भय दूर होता है, क्लेश मिटते हैं। 

इसके गंभीर भावों पर विचार करने से मन में श्रेष्ठ ज्ञान के साथ भक्ति-भाव जाग्रत होता है। इस रचना के साथ विशेष बात यह है कि दक्षिण भारत के मंदिरों में भी यह वहाँ की लिपि में लिखा हुआ देखा जा सकता है, तथा दक्षिण के हनुमान भक्त यदि हिन्दी न भी जानते हों तो भी इसे एक मंत्र के समान याद रखते हैं।

 उल्लेखनीय है कि संस्कृत के तो अनेक स्तोत्र उत्तर-दक्षिण में प्राचीन काल से ही समान रूप से लोकप्रिय हैं, परन्तु भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी की विरली ही रचनाओं को यह गौरव प्राप्त हो सका है।

वर्तमान युग में हनुमान भगवान शिव के एक ऐसे अवतार हैं, जो अति शीघ्र प्रसन्न होते है और जो अपने भक्तों के समस्त दु:खों को हरने मे समर्थ हैं। हनुमान का नाम स्मरण करने मात्र से ही भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं।

 क्योंकि इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है, इसी कारण हनुमान जी जन साधारण में अत्यंत लोकप्रिय हैं। इनके मंदिर देश-विदेश सभी जगह स्थित हैं। 

अतः भक्तों को पहुँचने में अत्यधिक कठिनाई भी नहीं आती है। हनुमान को प्रसन्न करना अति सरल है। 'हनुमान चालीसा' और 'बजरंग बाण' के पाठ के माध्यम से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा-अर्चना से अपनी दैनिक दिनचर्या से थोडा-सा समय निकाल ले, तो उसकी समस्त परेशानी से मुक्ति मिल जाती है।

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