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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर भारत की एकता, सामाजिक सद्भाव, लोकतंत्र और देश के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत में फ्रांस और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक, इनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना भी है।
भारत और हिंदू समाज को बांटने की कोशिश का आरोप
मोहन भागवत ने कहा कि कुछ ताकतें भारत और हिंदू समाज को बांटना चाहती हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का समर्थन भी मिलता है। उन्होंने लोगों से सामाजिक एकता बनाए रखने और देश में विभाजन पैदा करने वाली मानसिकता के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को कमजोर करने की कोशिशों का जवाब उत्तेजना से नहीं, बल्कि समाज में एकजुटता और सहयोग बढ़ाकर दिया जाना चाहिए।
लोकतंत्र में आंदोलन जरूरी, लेकिन समाधान पर हो जोर
संघ प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना स्वाभाविक है, लेकिन उनका उद्देश्य समस्याओं का समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि आंदोलनों का इस्तेमाल राजनीतिक हितों को साधने, लोकप्रियता हासिल करने या समाज में तनाव और द्वेष बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, विरोध-प्रदर्शन ऐसे होने चाहिए, जिनसे समाज में संवाद और समस्याओं के समाधान का रास्ता निकले।
बंगाल विभाजन और 1947 के बंटवारे का किया जिक्र
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में बंगाल विभाजन और 1947 में भारत के विभाजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लॉर्ड कर्जन के समय हुआ बंगाल विभाजन चार साल बाद वापस लेना पड़ा, लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका। उन्होंने इसके लिए समाज में बढ़ती अलगाव की भावना और तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। भागवत ने कहा कि विभाजन के बाद शांति की जो उम्मीद थी, वह पूरी तरह पूरी नहीं हुई और सीमाओं पर आज भी अशांति बनी हुई है।
पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलने की अपील
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत के लोगों की सांस्कृतिक जड़ें और पूर्वज साझा हैं। उन्होंने जोर दिया कि देश की विविधता को स्वीकार करते हुए सभी समुदायों को साथ लेकर चलना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सामाजिक एकता को मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से देश की एकता, सद्भाव और विकास के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील





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