Tue, 16 Jun 2026

बिना दान, सुशीलता, कीर्ति ,सेवा और सेवा जीवन कुछ भी नहीं : योगिराज रमेश

न दाक्षिण्यं न सौशील्यं न कीर्तिःनसेवा नो दया किं जीवनं ते।


 ना दान है ना सुशीलता है ना कीर्ति है ना सेवा है ना दया है तो ऐसा जीवन क्या है?


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