Fri, 30 Oct 2026
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पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 तक महंगा होने के आसार, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी समय से स्थिर बनी हुई हैं।

इस स्थिति के कारण देश की तेल मार्केटिंग कंपनियों को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही कंपनियां इस घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में बड़ा इजाफा कर सकती हैं। अनुमान है कि पेट्रोल की कीमतों में ₹18 और डीजल में ₹35 प्रति लीटर तक की वृद्धि की जा सकती है।

प्रतिदिन करोड़ों का घाटा झेल रही हैं तेल कंपनियां
वर्तमान बाजार स्थितियों के अनुसार, कच्चा तेल महंगा होने की वजह से कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर ₹18 और डीजल पर ₹35 का शुद्ध घाटा हो रहा है। अगर पिछले महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो जब कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर थीं, तब देश की तीनों प्रमुख तेल कंपनियां प्रतिदिन करीब ₹2,400 करोड़ का नुकसान उठा रही थीं।

हालांकि केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती करने के बाद कंपनियों के इस दैनिक घाटे में कुछ कमी आई है और अब यह गिरकर ₹1,600 करोड़ के स्तर पर आ गया है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी कंपनियों के घाटे को ₹6 प्रति लीटर तक बढ़ा देती है।

चुनाव के बाद जनता पर पड़ेगा महंगाई का बोझ
जानकारों का मानना है कि फिलहाल चुनावी माहौल को देखते हुए सरकार और तेल कंपनियों ने कीमतों पर लगाम लगा रखी है। लेकिन जैसे ही पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आएंगे या मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी, वैसे ही तेल कंपनियां अपने घाटे को कम करने के लिए सख्त कदम उठाएंगी।

रिपोर्ट स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है कि पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले काफी कम हैं और यह अंतर लंबे समय तक बरकरार रखना संभव नहीं है। ऐसे में उपभोक्ताओं को आने वाले हफ्तों में ईंधन के लिए अपनी जेब और ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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