Mon, 03 Aug 2026
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वास्तु शास्त्र

दीवारों के भी कान होते हैं.... ये कहावत बचपन से जुड़ी हुई हैं। वास्तु शास्त्र के क्षेत्र में अब इस बात का प्रत्यक्ष रूप से पता चला की यह कहावत एक दम सही है। 

           #वास्तु शास्त्र में एक बात कही गई है कि वास्तु देव हमेशा ही नष्ट हो जाते हैं। यानी जो भी हम कहते हैं, नमूना है वोसे तुरंत #तथास्तु बोलता है यानी “ऐसा ही हो”।  

          अब हम अपने घर में, ऑफिस में, माल में, दुकान में जहां भी कुछ भी मिलता है वह सब उस स्थान की क़ीमती सुनता है, वहां का आकाश तत्व सुनता है फिर धारणा ही हमारे जीवन में होती है। 

           जैसे बहुत से लोगों में आदत होती है कि रेजगारी करना, साथियों को, अपने-अपने हिस्से में रहना, जैसे मेरी तो किस्मत ही खराब है, मैं तो बीमार ही रहता हूं, हमारा तो कोई भी काम आसानी से नहीं बनता है, मेरी पत्नी ख़राब है, मेरा बेटा सुनता नहीं है, बहू-सास अच्छी नहीं है.... आदि। 

       हम ये नहीं जानते कि ये सभी बातें जब निरंतर बोली जाती हैं तो फिर ये हमारी कुमारी, हमारे स्थान का आकाश तत्व, ब्रह्मांड इसे ग्रहण कर लेती है और फिर वास्तु देव कहते हैं "तथास्तु" यानी ऐसा ही हो और धारणा ही होने लगती है ।। 

      

     वास्तुशास्त्र से यदि हमें लाभ मिलता है तो सबसे पहले हमें अपने शब्दों पर ध्यान देना होगा। हम क्या बोल रहे हैं, बहुत सोच समझकर बात करेंगे, सबसे बड़ी बात हम क्या चाहते हैं वही बात करेंगे। 

 

अब अगर हम यही कहते हैं कि बहू बहुत देर हो चुकी है तो यकीन मानिये एक दिन बहुत देर से ही व्यवहार करेगा। 

क्योंकि ब्रह्मांड मांगे , वह इच्छा पूरी इच्छा जो हम बोलेंगे। 

       क्योंकि लगातार एक ही बात बहुत दिन तक बचे रहने से वो मंत्र बन जाता है और फिर एक दिन तक मंत्र सिद्ध हो जाता है। 

        इसलिए जीवन को, घर को, परिवार को, व्यापार को, रिश्ते को, पड़ोसी, रिश्तेदार, शरीर के बारे में बुरा न बोलकर उपहार आशीर्वाद दें।शिकायतें खाली कर दे फिर आप अपने जीवन में चमत्कार होते हुए देखें।

॥संपर्क॥

तिवारी #वास्तु 

      9780011033             

आपकी समस्या का अंत 

       परवीन तिवारी के संग

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