Thu, 29 Oct 2026
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कश्मीर में लोगों ने ईरान के लिए इकट्ठा किया फंड, करोड़ों रुपये का चंदा देख सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

कश्मीर घाटी में हाल ही में ईरान के समर्थन में जुटाए गए करोड़ों रुपये के चंदे ने देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घाटी के विभिन्न हिस्सों से अब तक लगभग 17.91 करोड़ रुपये की बड़ी राशि एकत्र की जा चुकी है।

हालांकि इस अभियान को आधिकारिक तौर पर मानवीय सहायता बताया जा रहा है, लेकिन इतनी बड़ी रकम का अचानक जमा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। एजेंसियों को अंदेशा है कि इस विशाल फंड का दुरुपयोग देश विरोधी गतिविधियों या टेरर फंडिंग के लिए किया जा सकता है, जिसके मद्देनजर अब पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।

बड़गाम और शिया समुदाय की बड़ी भागीदारी

इस पूरे फंडरेजिंग अभियान के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि एकत्र की गई कुल राशि का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले शिया समुदाय द्वारा दान किया गया है। इसमें मध्य कश्मीर का बड़गाम जिला सबसे आगे रहा है, जो एक शिया बहुल इलाका माना जाता है। आंकड़ों के मुताबिक अकेले बड़गाम से ही करीब 9.5 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई है। इस बड़े आर्थिक योगदान ने जांच अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जो अब इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि यह पैसा किन माध्यमों से जमा हुआ और इसका अंतिम गंतव्य क्या है।

धार्मिक माध्यमों का उपयोग और सुरक्षा एजेंसियों की आशंका

यह पूरा धन संग्रह 'जकात' और 'सदका' जैसे धार्मिक माध्यमों के जरिए किया जा रहा है, जो इस्लाम में दान के पवित्र स्वरूप माने जाते हैं। आयोजकों का दावा है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मौजूदा वैश्विक संघर्षों और कठिन परिस्थितियों से प्रभावित ईरानी नागरिकों की आर्थिक मदद करना है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी ऑडिट के अभाव में इस तरह के फंड के गलत हाथों में जाने का जोखिम हमेशा बना रहता है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां उन सभी चैनल्स की बारीकी से जांच कर रही हैं जिनके जरिए यह पैसा ट्रांसफर करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।

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