पंडित विनय तिवारी के कथन ।
जीवन के किसी कालखंड में आपने यदि आपने अपना क़ीमती समय और ऊर्जा ऐसे कार्य या व्यक्ति पर लगायी जिससे आपको अंततः भारी नुक़सान हुआ तो उसे व्यर्थ न मानें सच तो यह है कि उस समय आपकी चेतना संस्कार और परिस्थितियां आपको उस कर्म के प्रति बाध्य कर रही थी ।
संघर्ष जितना बड़ा होगा ।जीत उतनी ही शानदार होगी ।


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