विश्लेषण : न्याय के मंदिर की साख और शिक्षा की मर्यादा, एक विचारणीय प्रश्न
*अपने प्रति किसी के द्वारा किया हुआ उपकार ,अपने द्वारा किसी की गई बुराई ,अपने को मिले धन ,मान, पद की अनिश्चतता हमेशा याद रखो ।
* मानव जीवन को सफल बनाने के लिए अपने चरित्र मन तथा हृदय को परम पवित्र बनाना ज़रूरी है ।
* प्रार्थना मेरी आत्मा के लिए उतना ही अनिवार्य है जितना शरीर के लिए भोजन ।



Comments
No comments yet.