हिमाचल प्रदेश समेत देशभर में तैयार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन CDSCO द्वारा जारी ड्रग अलर्ट में कुल 215 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 71 दवाएं हिमाचल में निर्मित बताई गई हैं, जिससे राज्य के फार्मा उद्योग पर सवाल उठने लगे हैं।
कई श्रेणियों की दवाएं जांच में फेल
जांच में फेल दवाएं एलर्जी, अस्थमा, बुखार-दर्द, एंटीबायोटिक्स और कफ-कोल्ड सिरप जैसी सामान्य बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली श्रेणियों से जुड़ी हैं। विशेष चिंता की बात यह है कि 16 कफ सिरप के नमूने भी गुणवत्ता परीक्षण में असफल पाए गए हैं।
सोलन का फार्मा हब होना चिंता बढ़ाने वाला
राज्य का सोलन जिला देश का प्रमुख फार्मास्यूटिकल हब माना जाता है। ऐसे में लगातार दवा सैंपल फेल होने से न केवल स्थानीय उद्योग बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर दवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। जांच में सामने आया कि जिन कंपनियों के नाम लेबल पर थे, उन्होंने संबंधित बैच बनाने या सप्लाई करने से इनकार कर दिया। इससे बाजार में फर्जी दवाओं की घुसपैठ की आशंका गहरा गई है।
निर्माताओं को नोटिस, बैच रिकॉल के आदेश
राज्य दवा नियंत्रक ने बताया कि जिन दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं, उनके निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। साथ ही सभी संदिग्ध बैचों को बाजार से तुरंत वापस मंगाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी मामलों की विस्तृत जांच जारी है।



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