शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया आज जालंधर पहुंचे। उन्होंने लक्की ओबरॉय हत्याकांड को लेकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और 'आप' सरकार समेत डीजीपी गौरव यादव को आड़े हाथों लिया।
"जब सत्ताधारी दल का नेता सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या होगा?"
मजीठिया ने कहा कि जालंधर में दिन-दहाड़े सत्ताधारी पार्टी के नेता का कत्ल होना इस बात का सबूत है कि पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार के अपने लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
डीजीपी की कार्यप्रणाली और 'प्रहार-2' पर सवाल
डीजीपी गौरव यादव पर सीधा निशाना साधते हुए मजीठिया ने कहा कि डीजीपी को केवल अपनी कुर्सी प्यारी है। उन्होंने कहा कि पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है, लेकिन यहां पक्का डीजीपी न होने के कारण व्यवस्था चरमरा गई है। ऑपरेशन 'प्रहार-2' को उन्होंने महज एक पीआर स्टंट करार दिया।
मजीठिया ने पूछा कि अगर पुलिस ने अब 5 हजार लोग पकड़े हैं, तो पिछले साढ़े तीन साल से विभाग क्या कर रहा था? उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को टारगेट दिए गए हैं, जिसके चक्कर में निर्दोष नौजवानों को भी थानों में बिठाया जा रहा है।
आर्थिक बदहाली और पलायन का मुद्दा
मजीठिया ने पंजाब के आर्थिक हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य पर 5 लाख करोड़ का कर्ज चढ़ चुका है। इंडस्ट्री पंजाब छोड़कर बाहर जा रही है और कोई नया निवेश करने को तैयार नहीं है। उन्होंने SYL मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पंजाब जल्द ही हरियाणा को पानी देने की तैयारी में है, जो राज्य के साथ धोखा है।
लोकतंत्र की आवाज दबाई जा रही है
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि जो भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है या सच लिखता है, उस पर झूठे पर्चे दर्ज कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में लोकतंत्र का बचना मुश्किल है। अगर पंजाब को बचाना है, तो "दिल्ली वालों" को यहां से भगाना होगा।



Comments
No comments yet.