Thursday, 29 Jan 2026

पंजाब में काल बनकर आई चाइना डोर, स्कूल से घर लौट रहे इकलौते बेटे की मौत

शनिवार की वह सुबह लुधियाना के समराला के एक परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला अंधेरा लेकर आई। एक छात्र, जो अपने भविष्य के सपने आंखों में सजाए स्कूल गया था, उसे क्या पता था कि घर वापसी का रास्ता उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। समराला के पास मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने घर लौट रहे इस मासूम के गले में अचानक चाइना डोर उलझ गई।

महज कुछ ही सेकंड में उस जानलेवा डोर ने छात्र के गले पर इतना गहरा घाव कर दिया कि उसे संभलने तक का मौका नहीं मिला। राहगीरों ने उसे लहूलुहान हालत में जमीन पर गिरते देखा और तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था; डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया।

सुध-बुध खो बैठी मां, चीख-पुकार से दहला कलेजा
जैसे ही इस हादसे की खबर घर पहुंची, खुशियों भरा माहौल मातम में बदल गया। अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने कलेजे के टुकड़े के बेजान शरीर को देख मां के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह वहीं बेसुध होकर गिर पड़ी। मां की चीखों ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

बदहवास मां को होश में लाने के लिए डॉक्टरों को तुरंत इलाज शुरू करना पड़ा, लेकिन बेटे के बिछड़ने का गम किसी भी दवा से कम होने वाला नहीं था। समराला पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया, मगर परिवार के लिए यह क्षति कभी न पूरी होने वाली है।

गले में फंदा बनी डोर और लहूलुहान होकर सड़क पर गिरा छात्र
मृतक के दादा जसपाल सिंह ने रुंधे गले से बताया कि उनका पोता शनिवार सुबह रोज की तरह अपनी मोटरसाइकिल लेकर स्कूल गया था। दोपहर को जब वह गांव भरतला के पास पहुंचा, तो हवा में तैर रही खूनी चाइना डोर उसके गले का फंदा बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डोर लिपटने के बाद छात्र की गर्दन पर इतना गहरा कट लगा कि खून का फव्वारा फूट पड़ा और वह देखते ही देखते सड़क पर गिर गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी सांसों की डोर टूट चुकी थी। एक पल की लापरवाही और बाजार में बिकती मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया।

प्रशासन की लापरवाही पर दादा का आक्रोश, कब तक बलि चढ़ेंगे मासूम?
इस घटना के बाद मृतक के दादा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भरे मन से आरोप लगाया कि समराला में प्रतिबंधित चाइना डोर सरेआम बेची जा रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

जसपाल सिंह ने कहा कि इससे पहले भी कई लोग इस खूनी डोर की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं, फिर भी इसे पूरी तरह बंद करवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। परिवार का कहना है कि अगर प्रशासन ने पहले ही सख्ती दिखाई होती और इन मौत के सौदागरों पर नकेल कसी होती, तो आज उनका बच्चा उनके बीच जिंदा होता।


16

Share News

Login first to enter comments.

Latest News

Number of Visitors - 132708