राकेश राठौर ने राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ का अपने निवास स्थान पहुंचने पर किया पुष्पित अभिनंदन ।
जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुआ दर्दनाक सड़क हादसा देश के लिए एक ऐसी जख्म दे गया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। इस हादसे में भारतीय सेना के 10 जांबाज जवानों ने अपनी शहादत दी है, जिनमें आनंदपुर साहिब के नूरपुर बेदी स्थित गांव चनौली का वीर सपूत जोबनप्रीत सिंह भी शामिल है। यह खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। जिस घर में अगले महीने शहनाइयां गूंजने वाली थीं और खुशियों का माहौल था, आज वहां चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है।
अगले महीने जानी थी बारात, तिरंगे में लिपटकर आया
23 वर्षीय जोबनप्रीत सिंह के घर में इन दिनों शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। परिवार के सदस्य बेटे के सिर पर सेहरा सजाने का सपना देख रहे थे और कार्ड बांटने की योजना बन रही थी। नियति को कुछ और ही मंजूर था; जिस घर में दुल्हन के स्वागत की तैयारी थी, वहां अब उस जांबाज की अंतिम विदाई का इंतजार हो रहा है। खुशियों की जगह अब गम के आंसुओं ने ले ली है और पूरे गांव की आंखें इस जवान की शहादत पर नम हैं।
'ऑपरेशन से आकर बात करूँगा'— पिता से कहे थे ये आखिरी शब्द
शहीद के पिता बलवीर सिंह की रुलाई थमने का नाम नहीं ले रही है। उन्होंने भरे मन से बताया कि महज दो दिन पहले ही उनकी बेटे से फोन पर बात हुई थी। जोबनप्रीत ने बड़े उत्साह से कहा था कि वह एक जरूरी ऑपरेशन पर जा रहा है और वहां से लौटकर विस्तार से बात करेगा। पिता को क्या पता था कि बेटे की वह आवाज उनके कानों में आखिरी बार गूंज रही है। वह 'वापस आकर बात करने' का वादा तो कर गया, लेकिन तिरंगे में लिपटकर लौटने की खबर दे गया।
2019 में वर्दी पहनकर पूरा किया था देश सेवा का सपना
जोबनप्रीत सिंह का बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। इसी जज्बे के चलते वह सितंबर 2019 में भारतीय सेना का हिस्सा बने थे। मौजूदा समय में वह 8 कैवेलरी, आर्मर्ड यूनिट (4 RR) में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और वीरता से सबको प्रभावित किया था। आज उनके बलिदान पर न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे देश को गर्व है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शहीद जोबनप्रीत और उनके साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।






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