* मन को क़ब्ज़े में रखना अभ्यास और वैराग्य से ।
* मनुष्य अपने संकल्प विकल्प कल्पना से ही अपने आपको सफल अथवा विफल बनाता है ।
* निस्वार्थ सेवा ही मैत्री का सात्त्विक आधार रहा है ।
* मन को क़ब्ज़े में रखना अभ्यास और वैराग्य से ।
* मनुष्य अपने संकल्प विकल्प कल्पना से ही अपने आपको सफल अथवा विफल बनाता है ।
* निस्वार्थ सेवा ही मैत्री का सात्त्विक आधार रहा है ।
Comments
No comments yet.