केवल भजन भागवत नाच गाने से धर्म की रक्षा नहीं हो सकती।
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सातवीं शताब्दी में पोपग्रेगरी ईसाई बनाने का बहुत बड़ा कार्यक्रम चला रहा था उसके प्रचारक जी जान से लोगों को ईसाई बनने के लिए तैयार कर रहे थे बुद्धिमान पोप ने अपने प्रचारको से कहा की मूर्ति पूजन करने वाले लोगों से उनकी परंपराओं का किसी तरह से खंडन और विरोध नहीं करना केवल एक कार्य करो कि उनके त्योहारों का परंपराओं का ईसाई करण करो इससे काफी मूर्तिपूजक तुम्हारी बातों को मानेंगे और इसाई इसी तरह इस समय कर रहा है क्योंकि यीशु को परमात्मा कहा जाताहै परमपिता कहा जाता है ईश्वर कहा जाता है परमपिता कह कर उन्हें हमारे भगवान के समकक्ष खड़ा करता है लेकिन हमारे परम ज्ञानी हिंदू लोग इसे समझें तभी ठीक रहेगा हमारे धर्म की कथा कहने वाले भागवत कहने वाले रामायण कहने वाले क्या सिखा रहे हैं क्या करा रहे हैं यह समझने लायक है केवल भजन गाना नाचना यह हमारे धर्म की रक्षा नहीं कर सकता



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