Fri, 31 Jul 2026
G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के। G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के।

मन की शांति

चित्त और वृत्ति को समझना होगा ।
​ एकाग्रता का भ्रम:
आप सब ने एकाग्रता पाने के लिए तमाम योग और विधियाँ
अपनाईं। लेकिन, ज़रूरी नहीं कि दूसरों के बताए रास्ते आपके लिए भी काम करें। उनकी मानसिक अवस्था (वृत्ति) और आपकी अवस्था में ज़मीन-आसमान का अंतर हो सकता है।
​ शून्य ही द्वार है:
आप सब शून्य की तलाश में हो। क्यों? क्योंकि शून्य के बिना 'महाशून्य' (परम सत्य) को नहीं जाना जा सकता। बुद्धि से
 केवल तर्क किया जा सकता है, अनुभव नहीं।
​ समाधान क्या है?
चित्त की एकाग्रता और शून्य—ये अलग नहीं हैं।
अक्सर हम गलती यह करते हैं कि जब मन 'अशांत' होता है, तो हम जबरदस्ती उसे 'शांत' करने की कोशिश करते हैं। यह संघर्ष कभी शांति नहीं ला सकता। पहले जल पिए फिर धीमी सांसों से मन को स्थिर होने दें।
​सही विधि:
अगर मन अशांत है, तो उस अशांति पर ही एकाग्र हो जाओ। बस उस अशांति में ठहर जाओ ,प्रतीक्षा करो।
जैसे ही आप उस अशांति पर एकाग्र होंगे, वहां 'शून्य' का निर्माण होगा। और जहाँ शून्य है, वहां शांति अपने आप घटित हो जाएगी।
​ अशांति से भागो मत, उसे देखो। वह अपने आप विलीन हो जाएगी।

ध्यान डिस्कोर्सेस के लिए आचार्य पूजा जैन ।
फोन /98789995575 ओनली व्हाट्स ऐप मैसेज नो. फॉर रजिस्ट्रेशन 

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 188566