विज्ञान भैरव तंत्र में ध्यान विधि-
श्वास के आरंभ में मौन का अनुभव
देवी ने पूछा —
“प्रभु, जब श्वास भीतर प्रवेश करती है, क्या उस आरंभ में भी ध्यान संभव है?”
शिव बोले —
“देवी, जब पहली श्वास भीतर जाती है — उस प्रवेश के प्रथम क्षण में सजग रहो।
सजगता ही तुम्हारा प्रवेशद्वार है।”
ओशो कहते हैं:
“हर श्वास के आरंभ में एक सूक्ष्म मौन होता है।
जो उसे पहचान लेता है, वह अपने भीतर की यात्रा शुरू कर देता है।”
ध्यान की विधि:-】
श्वास के आरंभ को महसूस करो।जब हम श्वास लेते हैं तब हम सोचते हैं कि हवा लेना ही श्वास हैं पर हवा तो श्वास लेने का निमित्त मात्र है असलियत में हमारे भीतर प्राण जा रहा होता है.
उस प्रथम स्पर्श में ठहरो।
धीरे-धीरे वही क्षण तुम्हें गहराई में ले जाएगा।
शिव कहते हैं —
“आरंभ में जो मौन है, वही अनंत की पहली झलक है।”
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