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आंबेडकर नगर का मामला CM मान तक पहुंचा
14 तारीख को अदालत में सुनवाई : सरकारी रेट पर जमीन की रजिस्ट्री का प्रस्ताव तैयार, खाली जमीन पर बन सकते हैं फ्लैट
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जालंधर (राजन) : पावरकाम से अदालत में केस हारने के बाद आंबेडकर नगर में बसे घरों को गिराने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन राजनीतिक संरक्षण के चलते यह क्षेत्र आने वाले वर्षों तक सुरक्षित रहने की संभावना है। इस बार आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया है। इससे पहले कांग्रेस ने कब्जाधारियों को कानूनी अधिकार दिलाने के लिए आधार कार्ड, बिजली, पानी और सीवरेज के कनेक्शन प्रदान किए थे। पावरकाम की जमीन पर बसे आंबेडकर नगर का विवाद अब सीएम पंजाब तक पहुंच गया है। 14 नवंबर को अदालत में इस मामले की एक बार फिर सुनवाई होगी ।
पावरकाम के खिलाफ केस लड़ने वाले मुख्य याचिकाकर्ता कृपाल सिंह का निधन हो चुका है, जिसके बाद केस की पैरवी कमजोर हो गई है। अब इस मामले को लड़ने के लिए दस सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व आम आदमी पार्टी जालंधर सेंट्रल के प्रभारी नितिन कोहली कर रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को सीएम तक पहुंचाया है।
उन्होंने आंबेडकर नगर में रहने वालों के लिए सरकारी रेट पर जमीन की रजिस्ट्री का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए आंबेडकर नगर का नक्शा तैयार कर कब्जाधारियों की पहचान की जा रही है। अब इस मामले की अदालत में नए सिरे से पैरवी की जाएगी।
अभी भी हो रहे कब्जे पावरकाम खामोश क्यों : नितिन कोहली
पावरकाम की जमीन पर कब्जे की घटनाओं पर सवाल उठाते नितिन कोहली ने कहा कि जब कब्जे हो रहे थे, तब अधिकारी कहां थे? अब आंबेडकर नगर बस चुका है और कई परिवार यहां निवास कर रहे हैं। केस की पैरवी न होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। गुरुनानक पुरा के पास पावरकाम की जमीन पर हाल ही में कब्जा हुआ है, जिस पर अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। पावरकाम ने आंबेडकर नगर में कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया है, जबकि पास में तीन एकड़ खाली जमीन भी उपलब्ध है। अदालत में इस मामले की पैरवी की जाएगी। सरकार के साथ बातचीत चल रही है कि आंबेडकर नगर के निवासियों को सरकारी रेट पर प्रापर्टी देकर मालिकाना हक दिया जाए या फिर पीछे खाली पड़ी तीन एकड़ जमीन पर सरकारी तौर पर क्वार्टर बनाकर दिए जाएं।
ऐसे शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 2003 से लद्देवाली फ्लाईओवर के पास 65.50 एकड़ जमीन से कब्जे छुड़वाने के लिए चल रहा है। सरकार ने यहां सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए 1969 में 75 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की थी। 1997 में सरकार ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए कालोनी बनाने के लिए बिजली बोर्ड को 65.50 एकड़ जमीन दी। यहां गेस्ट हाउस, सेंट्रल स्टोर और कर्मचारियों के लिए क्वार्टर बने। खाली जमीन पर कब्जा कर डा. बीआर आंबेडकर नगर बस गया। कब्जे हटाने के लिए बिजली बोर्ड ने 2003 में जालंधर कोर्ट में केस दायर किया। 12 दिसंबर 2014 को कोर्ट ने पावरकाम के पक्ष में फैसला दिया। आंबेडकर नगर के निवासियों ने 12 जनवरी 2015 को कोर्ट में अपील की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2025 तक पुलिस प्रशासन को कब्जा लेने के वारंट जारी किए है। अब केस की सुनवाई 14 नवंबर को होगी

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