Sun, 22 Mar 2026
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ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर फर्जीवाड़ा, कनाडा बैठे युवक का शहर में बना दिया ड्राइविंग लाइसेंस पढ़ें पूरी खबर 

ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर फर्जीवाड़ा, कनाडा बैठे युवक का शहर में बना दिया ड्राइविंग लाइसेंस

पढ़ें पूरी खबर 

 

जालंधर (राजन) : महानगर के आरटीओ के अंतर्गत आते आटॉमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर चल रहे एजेंटों के खेल में एक नया फर्जीवाड़ा सोमवार को उजागर हुआ है। इसके बाद ड्राइविंग ट्रैक पर संक्रिय एजेंटों से लेकर अफसरों में हलचल बढ़ गई है। पता लगा है कि पक्का बाग निवासी युवक पिछले करीब छह माह से स्टडी वीजा पर कनाडा में है और एजेंटों की मिलीभगत से उसका ड्राइविंग लाइसेंस ड्राइविंग ट्रैक से जारी कर दिया गया है।

दफ्तरी रिकार्ड के अनुसार पक्का बाग के मकान नंबर ई-क्यू-105 निवासी कृष्णा खुराना पुत्र सुरेश कुमार ने बीती 13 अक्टूबर को टेस्ट पास किया और उसी दिन शाम को 'उसको एटीओ की ओर से मंजूरी भी दे दी गई। शिकायत के अनुसार कृष्णा खुराना कनाडा में है और उसने स्थानीय ड्राइविंग ट्रैक पर टेस्ट ही नहीं दिया। इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि आवेदक युवक के नाम पांच जुलाई और 24 जुलाई 2024 को स्क्रूटनी व फोटो का सारा काम पूरा हो जाता है। मगर लर्निंग लाइसेंस के बाद पक्का लाइसेंस बनने में एक साल दो महीने का लंबा समय लग जाता है। इस बीच चार बार लर्निंग लाइसेंस को रिन्यू करवाया जाता है और आवेदक 13 अक्टूबर को पहली बार में ही टेस्ट पास कर जाता है।

 

मामले की शिकायत सीएम, विजिलेंस ब्यूरो को की गई

ड्राइिवंग ट्रैक पर फर्जीवाड़े के इस मामले की शिकायत सीनियर कांग्रेस नेता एवं आरटीआइ एक्टिविस्ट संजय सहगल ने की है। उन्होंने ई-मेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत की कापी सीएम भगवंत मान के दफ्तर, विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट मैत्री, स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को भेजी है।

 

मामला ध्यान में, जांच की जा रही: एटीओ

शिकायत के बारे में आटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की इंचार्ज एटीओ कमलेश कुमारी का कहना है कि कनाडा बैठे युवक का ड्राइविंग लाइसेंस बनने का मामला पहले ही उनके ध्यान में है। इस मामले की गहनता के साथ जांच की जा रही है। चंडीगढ़ स्थित मुख्य दफ्तर से सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग भेजने के लिए अथारिटी को पत्र लिखा जाएगा, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि उस समय टेस्ट किसने दिया था। जांच में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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