परीक्षाओं में बच्चों का तनाव घटाएंगे काउंसलर और मनोवैज्ञानिक
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जालंधर (राजन) : स्कूली विद्यार्थियों को तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से काउंसलर और साइकोलाजिस्ट की नियुक्ति की जाएगी। यह कदम विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान उत्पन्न होने वाले तनाव को स्वयं से दूर रखने के उपाय सिखाने के लिए उठाया जा रहा है। यह प्रक्रिया स्कूल के भीतर शिक्षकों और नान टीचिंग स्टाफ के माध्यम से भी संचालित फो जाएगी। इसके लिए शिक्षकों और नान टीचिंग स्टाफ को साल में दो बार विशेषज्ञ साइकोलाजिस्ट से अशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे विद्यार्थियों को समय-समय पर मार्गदर्शन कर सकें और हर स्थिति में उनकी सहायता कर सकें।
इस प्रशिक्षण में उन्हें भावनात्मक तरीके से और बिना किसी भेदभाव के विद्यार्थियों को पढ़ाने और सिखाने की विधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए स्कूलों और शिक्षण संस्थानों को दिए गए निर्देशों के तहत लिया गया है।
ये नियम प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट स्कूलों पर लागू होंगे। इससे सभी स्कूलों में एक योग्य काउंसलर या साइकोलाजिस्ट विद्यार्थियों को परीक्षाओं और परिणामों के तनावपूर्ण समय में सहायक तरीके से स्थिति का सामना करने के लिए तैयार करें। इसके अलावा, सभी स्कूलों में और उनकी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर 14416 या 18008914416 अंकित किया जाएगा, ताकि जो विद्यार्थी इस समस्या का सामना कर रहे हैं, वे इन नंबरों पर काल करके सहायता प्राप्त कर सकें।
करियर काउंसलिंग सेशन भी छात्रों के लिए करवाएंगे
स्कूल मुखियों को निर्देश दिए कि अध्यापक-पेरेंट्स मीटिंग के दौरान विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाएं। विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए करियर काउंसलिंग सेशन किए जाएंगे। विद्यार्थियों को एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
डायरेक्टर एससीईआरटी ने जारी की गाइडलाइंस
डायरेक्टर एससीईआरटी पंजाब पीसीएस किरण शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के आधार पर गाइडलाइंस जारी की हैं। सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों, सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रमुखों को इन निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया है। उन्होंने सभी को स्कूल में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करने और स्कूल की दीवारों पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित स्लोगन लिखवाने के लिए कहा है।
शिक्षण संस्थानों को स्कूलों में इंस्टीट्यूशनल टास्क फोर्स बनाने व नोडल अफसर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक स्कूल में किसी प्रकार की हैरेसमेंट की रोकथाम के लिए एंटी हैरेसमेंट कमेटी का गठन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी अपनी समस्याओं को साझा कर सकें। स्कूलों में होने वाली मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों व काउंसलिंग सत्रों की रिपोर्ट मुख्य दफ्तर में जमा करवाई जाएगी।






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